Saturday, 27 January 2018

लघुकथा- घरेलू हिंसा।

















अंकिता और सुरेश की शादी को दस साल हो गए थे। एक 6 साल की बेटी भी थी। पहले सब कुछ ठीक रहा लेकिन बेटी होने के बाद दोनों में झगड़ा होना शुरू हो गया।
सुरेश अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से पूरा नहीं करता था और बोलने पर अपनी पत्नी को मारता पिटता था।

सुबह का समय था। डाईनिंग टेबल पर नाश्ता लग चुका था। "अरे पीहू बेटी, आ जाओ जल्दी से नाश्ता करने," अंकिता ने अपनी बेटी को आवाज लगाई।
"अभी आ रही हूँ मम्मी बस लिप्स्टिक लगाकर" बेटी ने जवाब दिया।
थोड़ी देर बाद पीहू अपने पूरे चेहरे और हाथ पर लिप्स्टिक से अजीब निशान बनाकर आई। ऐसा लगा मानो वो चोट के निशान थे। पापा ने पूछा," अरे बेटा पीहू ये क्या करके आई हो।" पीहू ने जवाब दिया," कुछ नहीं पापा बस मम्मी के जैसी दिखने की कोशिश कर रही हूँ।"
सुरेश अपनी पत्नी और बेटी से नजर नहीं मिला पा रहा था।

©नीतिश तिवारी।

2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (29-01-2018) को "नवपल्लव परिधान" (चर्चा अंक-2863) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

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    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

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