Wednesday, 18 April 2018

गले लग जाती हो।














लफ्ज़ भी गुलाम हो जाते हैं मेरे,
जब तुम अपना बनाने का इशारा करती हो।
धड़कनों को हर बार सुकून मिल जाता है,
जब तुम चुपके से आकर गले लग जाती हो।

@नीतिश तिवारी।

Thursday, 5 April 2018

भीगी सिगरेट और इश्क़.




कभी आईने को देखें फिर तुम्हें निहारें,
मोहब्बत में हम खुद को कैसे संभालें.

तेरे इश्क़ में भीगे हुए सिगरेट सा हो गया हूँ,
आ मुझे अपनी बाहों की गर्मी से सुलगा दे.

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 3 April 2018

Got married.




पिछले कुछ दिनों से अत्यधिक व्यस्तता के कारण आप सभी से मुख़ातिब नहीं हो पाया। दिनांक 10 मार्च 2018 को विवाह सम्पन्न हुआ। परम पिता परमेश्वर का धन्यवाद। 
ज्यादा कुछ ना कहते हुए बस कुछ पंक्तियाँ अपनी अर्धांगिनी के लिए।

ये पल बहुत खूबसूरत है, 
इसमें तुम जो हो।
शुक्रिया तुम्हारा मेरी अर्धांगिनी बनने के लिए।

Nitish.

Sunday, 18 March 2018

इनाम मिला है.






बरसों की तड़प का मुझे इनाम मिला है,
इश्क़ में आज मुझे एक मुक़ाम मिला है.

थोड़ा सब्र का लेता तो मुक़ाम भी मिल जाता,
उसकी बेवफाई का मुझे इंतकाम भी मिल जाता।

©नीतिश तिवारी।

Thursday, 1 March 2018

व्यंग--गुलाल, कंगाल, मालामाल।
























किसी ने रंग उड़ाये, किसी ने गुलाल,
नीरव मोदी पैसा उड़ाया, बैंक हुआ कंगाल।

शौचालय,बिजली,घर से किया सबको मालामाल,
सब जगह मोदी जी छाये, कांग्रेस का हुआ खस्ता हाल।

लालू जी की बेल हुई है नामंजूर,
और होली में रहेंगे अपने घर से दूर।

केजरीवाल ने कुमार विश्वाश को दिखाई ऐसी सुनामी,
बन गए वो राजनीति में सबसे कम उम्र के आडवाणी।

होली में भाभी बनाएं मालपुआ, लेकिन हमरा चाही रसपुआ,
बड़कन के लिहीं आशीर्वाद, छोटकन के दिहीं हम दुआ।

होली की शुभकामनाओं के साथ,
आपका 
©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 28 February 2018

मशहूर होने दो।






















ख्वाहिशें पूरी हुयीं, तुम पर ऐतबार हुआ।
लो आ गया सनम मैं, खत्म तेरा इंतज़ार हुआ।।

मेरी चाहतों पर दुनिया वालों यूँ बंदिशें ना लगाओ।
मुझे अपनी हस्ती बदलनी है,मुझे मशहूर होने दो।।

©नीतिश तिवारी।

मेरा रंग बन जाना।
























अबकी होली खास है,
मेरा महबूब मेरे पास है।

मैं जी भर के होली खेलूँगा,
तुम मेरा रंग बन जाना।
जब फुर्सत मिले कभी तो,
तुम मुझे अंग लगाना।

मैं तुम्हारे लिए काँटों से लडूंगा,
फिर तुम मेरा फूल बन जाना।
अबकी होली खास है,
मेरी मुस्कुराहट मेरे साथ है।

 होली की हार्दिक शुभकामना।

©नीतिश तिवारी।

Monday, 26 February 2018

मैं एक कवि हूँ।




















कभी-कभी शब्द
नहीं मिलते,
फिर भी खयालों
को बुनने का
मन करता है।
नदी किनारे सीप
की मोतियों को
यूँ ही चुनने का
मन करता है।
मैं एक कवि हूँ।

गुजरते हुए इस
वक़्त को थामने
का मन करता है।
सोचता हूँ कुछ
ऐसा लिख जाऊँ
जो अमर प्रेम 
कृति बन जाए।
मैं एक कवि हूँ।

मुश्किलें तो बहुत
आती हैं पर
हौंसला नहीं खोते हैं।
हर परिस्थिति में
एक जैसे रहें,
कवि वैसे होते हैं।

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 25 February 2018

Tribute to Shridevi.



















आपके जाने से भारतीय सिनेमा को अपूरणीय क्षति हुई है।
 कुछ पंक्तियाँ।

अब नहीं महकेगी चाँदनी कभी,
कौन MR INDIA के लिए बेताब होगा,
आपके जाने से हम सब को लगा है सदमा
एक लम्हे में जिंदगी चली गयी,
ये जुदाई बहुत दुखदायी है।

नमन।
©नीतिश तिवारी।

Saturday, 24 February 2018

लप्रेक-मोहब्बत में घोटाला।
























तुम ये बात-बात पर अपने सौंदर्य प्रसाधन का जो डिमांड करती हो ना, मुझे तेरी मोहब्बत में घोटाला नज़र आता है। और ये घर छोड़कर मायके जानेवाली धमकी तो महाघोटाला लगता है। ज्यादा नीरव मोदी बनने की कोशिश ना करो क्योंकि मैं कोई PNB तो हूँ नहीं जो तुम लूटकर चली जाओगी। चलो मान लिया कि तुम मेरे दिल से खेलकर मोहब्बत में घोटाला कर लोगी। पर ये मत समझना कि मैं काँग्रेस की तरह ऑडिट नहीं होने दूँगा। प्यार में भ्रष्टाचार की लड़ाई के लिए बैठ जाऊँगा अनशन पर अन्ना की तरह, एक नए मोहब्बत के केजरीवाल की तलाश में।

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धन्यवाद।
©नीतिश तिवारी।

Friday, 23 February 2018

सोलहवाँ सोमवार।
























आज रात अमावश जैसी लग रही है,
मेरा चाँद मेरे साथ जो है।

लो आ गया तुम्हारी नज़रों के सामने,
क्या आज तुम्हारा सोलहवाँ सोमवार है।

उनका दीदार हुआ और हमें प्यार हुआ,
फिर से आज नया एक त्योहार हुआ।

कदम बहके, होश उड़ गए, बैठे रहे मयखाने में,
इस मोहब्बत में ना जाने और क्या-क्या होगा।

©नीतिश तिवारी।

Thursday, 22 February 2018

मोहब्बत का असर।























कुछ लोगों में ऐसा भी हुनर होता है।
कि धीरे-धीरे मोहब्बत का असर होता है।।

याद करना जिन्हें हमारी रवायत बन गयी है।
फिर भी उनको कुछ नहीं खबर होता है।।

ख्वाहिशों की दुनिया भी बड़ी अजीब होती है।
नहीं मिल सकता उसका भी मंजर होता है।।

हमें देखकर भी वो अनदेखा कर देते हैं।
और सिर्फ उन्हीं पर हमारा नजर होता है।।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 21 February 2018

तुम्हारी बेवफाई।























तुम्हारी बेवफाई ने एक बात तो सीखा दिया,
कि हम अंधों के शहर में आईना बेच रहे थे।
वैसे तो वक़्त ने ज़ख्म ढकने को लिबास दिया,
फिर भी अपनों की चाहत में दर बदर भटक रहे थे।

©नीतिश तिवारी।



Tuesday, 20 February 2018

एक कहानी लिखता हूँ।























चलो आज मैं
एक कहानी
लिखता हूँ।
मैं अपने को 
राजा और 
तुम्हें रानी
लिखता हूँ।

तुम्हारी कही बातें
तुम्हारी ही जुबानी
लिखता हूँ।
जो हमने किया
था प्यार,
उसकी मैं निशानी
लिखता हूँ।

अब नहीं रहे 
हालात पहले जैसे
फिर भी सूखे
दरिया में पानी
लिखता हूँ।
जी रहे थे
हम कभी,
वो हसीन जवानी
लिखता हूँ।

चलो आज मैं
एक कहानी
लिखता हूँ।
कुछ बचपन की
कुछ जवानी की
एक नादानी 
लिखता हूँ।

©नीतिश तिवारी।

Saturday, 17 February 2018

आधे से ज्यादा, पूरे से कम।























आधे से ज्यादा, पूरे से कम। वो नहीं मिली, इसका मुझे नहीं है कोई गम। हाँ पर दिल को तसल्ली जरूर देता हूँ कि वो अच्छी तो थी। मेरे दिल के बंजर ज़मीन में एक प्यार की सुनहरी बीज को उसने बो जरूर दिया था। वो अलग बात है कि उसके द्वारा बोया गया बीज अब पौधा बनकर किसी और की बगिया को रौशन कर रहा है। और इस पौधे को बाग के मालिक से शिकायत जरूर है। ठीक से पानी नहीं मिलने के कारण इसमें काँटे निकल आये हैं। जो नए बीज पनपने नहीं देते और एक डर सा लगा रहता है कि क्या पौधे का वज़ूद खत्म होने वाला है। तुम्हारे प्यार की बस इतनी सी निशानी थी। जो लिख दिया हमने बस वही एक कहानी थी।

©नीतिश तिवारी।