Sunday, 4 November 2018

ख्वाब ज़िन्दगी के।


















रात को नींद नहीं आती,
दिन को ख्वाब नहीं आते।
ये कैसे सवाल हैं तुम्हारे,
जिनके हमें जवाब नहीं आते।

अँधेरा छँट गया तो उजाला हो जाएगा,
मोम ज्यादा पिघला तो ज्वाला हो जाएगा।
ये सोचकर बाप रोज मजदूरी करता है कि,
भूखे बच्चे का एक निवाला हो जाएगा।

©नीतिश तिवारी।

Monday, 29 October 2018

लघुकथा- माशूक़ा का कॉन्ट्रैक्ट।






















माशूक़ा का कॉन्ट्रैक्ट।

भोला यादव इश्क़ में नाक़ाम हो जाने के बाद शहर के मशहूर डॉन अज्जू भाई के पास काम के लिए पहुँच चूका था। अपराध की दुनिया में अज्जू भाई को नए लड़कों को काम देने के लिए जाना जाता था।
"अज्जू भाई ये नया लड़का गैंग ज्वाइन करना चाहता है। " अज्जू भाई के ख़ास ने उनसे परिचय करवाते हुए कहा।
"क्या नाम है रे तेरा ?"
"जी, भोला, भोला यादव।"
"ठीक है भोला ये ले फोटो।  इसके पीछे पूरी डिटेल लिखी हुयी है। इसको कल टपकाना है।"
अज्जू भाई ने बिना देर किये हुए फोटो का लिफाफा थमा दिया और काम पर लग जाने को कहा।

भोला ने जैसे ही लिफ़ाफ़ा खोला, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। फोटो एक लड़की की थी। वही लड़की जिसने प्यार में भोला को ये कहकर धोखा दिया था कि 'तुम अभी भोले हो।' फोटो के पीछे कल लड़की को मारने का समय लिखा था- शाम को 5 बजे सिटी मॉल के बाहर।

भोला ने बिना किसी देरी किये अज्जू भाई को फोन मिलाया।
"भाई, मैं भोला।"
"हाँ, बोल।"
"भाई इस लड़की को कौन मरवाना चाहता है?"
"अरे तुझे उससे क्या? जो काम दिया है चुपचाप उसे कर।"
"पर भाई बताओ तो।"
"इसका पति इसे मरवाना चाहता है, उसी ने इसकी सुपारी दी है।"
भोला ने फोन काट दिया और सोचने लगा कि कैसे वो एक लड़की को मार पायेगा जिससे उसने कभी प्यार किया था।

रात भर के सोंच विचार के बाद उसने निर्णय लिया कि उसके पास कोई विकल्प नहीं है। क्योंकि वो ये मर्डर नहीं करेगा तो अज्जू भाई उसे छोड़ेंगे नहीं।

अगले दिन शाम को चार बजे से ही भोला और उसके साथी सिटी मॉल के बाहर जमा हो गए। भोला ने काम करने का निर्णय तो ले लिया था लेकिन उसके मन में एक अजीब सा द्वन्द चल रहा था। अचानक उसने मोबाइल निकाला और मैसेज टाइप किया। 
"मैं तुम्हें शाम को 5 बजे सिटी मॉल के बाहर शूट करने वाला हूँ, अपनी जिंदगी चाहती हो तो मत आना।"
तुम्हारा भोला।
मैसेज सेंड करके उसने उसे डिलीट कर दिया और घड़ी की तरफ देखने लगा , अभी भी 5 बजने में 20 मिनट बाकी थे।
भोला और उसके साथी एलर्ट हो गए। कुछ ही मिनटों में मॉल के गेट के पास एक कार आकर रुकी, उसमें से एक आदमी और उसके साथ वो लड़की बार आयी। भोला ने तुरंत उसे पहचान लिए। भोला के दिल में एक अजीब सी हलचल हुई।
उसने गन लोड किया और निशाना लगाने लगा, भोला को गुस्सा भी आ रहा था कि वो लड़की आयी ही क्यों जबकि उसने मैसेज कर दिया था। चंद लम्हों में भोला को गोली चलानी ही थी, उसने तुरंत गोली चला दी। लेकिन गोली लड़की को नही बल्कि उसके हसबैंड को लगी। शायद भोला ने अंतिम समय में निर्णय ले लिया था। अपने प्यार को जिंदा रखने की और अपना फर्ज पूरा करने की। 

©नीतिश तिवारी।


Sunday, 7 October 2018

मुलाक़ात होने वाली है.

























आज उनसे एक मुलाक़ात होने वाली है,
जो अधूरी रह गयी थी, वो बात होने वाली है.

चाँद, तारे  सब आ जाओ गवाह बनने,
फिर से वो चाँदनी रात होने वाली है. 

इश्क़ में डूब जाने का लंबा  इंतज़ार किया है मैंने,
अपने महबूब से मोहब्बत की शुरुआत होने वाली है.

भींग जाऊँगा मैं  उन्हें आगोश में लेकर,
आज मोहबत की नयी बरसात होने वाली है. 


©नीतिश तिवारी।

Saturday, 6 October 2018

ऐसा हुनर रहता है।

























तेरे होने से ना जाने क्यों मुझे डर लगता है,
ऐसा तो नहीं कि तेरे पास कोई खंज़र रहता है।

भरोसे के लायक ना तूने मुझे छोड़ा ना ज़माने को,
अब तो इन आँखों में आँसुओं का समंदर रहता है।

मोहब्बत से, रुसवाई से, दोनों से नवाज़ा है तूने,
तुम जैसे लोगों में ही तो ऐसा हुनर रहता है।

यकीं मैं दिलाऊँ भी तो अपने दिल को किस तरह,
जब तेरे जैसा हरजाई इस दिल के अंदर रहता है।

©नीतिश तिवारी।


Monday, 1 October 2018

युद्ध रचाती हो।





जान-जान कहके तुम मेरी जान ले जाती हो,
दूर रहकर भी मोहब्बत का एहसास कराती हो।

ये बिंदी, ये काजल, श्रृंगार नहीं हथियार हैं तुम्हारे,
इन कातिल अदाओं से मेरे दिल में युद्ध रचाती हो।

पलकें झपका के जब नज़रें मिला जाती हो,
घायल बनाकर फिर मेरा इलाज़ कर जाती हो।

ये तुम्हारे जीने की अदा है या मुझे तड़पाने की,
मौसम कोई भी हो बस तुम मुझपे बरस जाती हो।

©नीतिश तिवारी।




Thursday, 6 September 2018

Badnaam na karunga.

























तेरा नाम लेके मैं तुझे बदनाम ना करूँगा,
तेरी बेवफाई को मैं सरेआम ना करूँगा,
तू बसती है आज भी मेरे दिल में कहीं,
हरफ़ मोहब्बत का यूँ नीलाम ना करूँगा।

©नीतिश तिवारी।

Monday, 3 September 2018

इतनी हसीन क्यों हो तुम?

























कल रात मैंने सोंचा
तुम्हें अपनी शायरी में
लिख देता हूँ
पर जब लिखने बैठा
तुम तो ग़ज़ल बन गयी।

अपनी डायरी में
तुम्हारा नाम लिखते
वक़्त मैंने सोंचा
कि इतनी हसीन 
क्यों हो तुम
मेरे दिल का सुकून
क्यों हो तुम।

फिर अचानक खयाल
आया कि तुम तो
वही हो जिसे
खुदा ने तराशने में
कोई कसर ना छोड़ा

तेरी सूरत और सीरत
दोनों को
लाजवाब बनाया है।
कि तुम अपनी
आँखों से किसी
का क़त्ल कर सको
फिर भी लोग
तुम्हें बेगुनाह कहेंगे।

और इसका कारण
सब जानते हैं
मैं भी तुम भी
कि तुम इतनी
हसीन जो हो।

©नीतीश तिवारी।

Thursday, 23 August 2018

Sunday- Short Story (laghukatha)






















वरुण ऑफिस से घर आया तो पत्नी को गुस्से में पाया। उसने पूछ ही दिया, "क्या हुआ वंदना, क्यों गुस्से में नजर आ रही हो?" वंदना ने मुँह चिढ़ाते हुए तपाक से जवाब दिया, "गुस्सा ना करूँ तो क्या करूँ, आपने पिछले संडे वादा किया था कि इस संडे फिल्म दिखाऊंगा। और आज आप संडे को भी काम पर चले गए।" वरुण ने विनम्रता पूर्वक अपनी पत्नी से बोला, "इस संडे काम करने इसलिए गया था ताकि अगले संडे हमलोग फिल्म देखने जा सकें। मेरे पास पैसे नहीं थे।" वंदना चुपचाप खड़ी पति के चेहरे को निहार रही थी।


©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 21 August 2018

इश्क़ के चर्चे।
























तुम्हारे हिस्से के इश्क़ को मैं दफना चुका हूँ,
अब नए महबूब को मैं अपना चुका हूँ।
पुराने इश्क़ को सरेआम करने की धमकी मत दे,
अपने महबूब को तुम्हारे चर्चे मैं सुना चुका हूँ।

©नीतिश तिवारी।

Saturday, 18 August 2018

Adhura Pyaar.(incomplete love)







आज सुबह जब पत्नी के साथ बैठकर चाय के साथ अख़बार पढ़ रहा था तो अचानक ही एक जाना पहचाना चेहरा दिखा. खबर थी कि,"सरपंच के रूप में उत्कृष्ट काम कर रही हैं नीलिमा".  उसका नाम पढ़ते ही दिल में एक हलचल सी हुई. ये वही नीलिमा थी जो इंजीनियरिंग की तैयारी करते समय कब दोस्त बन गयी और दोस्ती कब प्यार में बदल गयी, पता ही नहीं चला था. पत्नी के जाने के बाद मैने ध्यान से फोटो देखा  और खबर पढ़ी. 
पर हैरान इस बात से था कि वो तो IIT Delhi से बीटेक कर चुकी थी. फिर सरपंच कैसे बन गयी.
कई बरसों बाद आज अचानक से उससे बात करने का मन हो रहा था. लेकिन मेरे पास उसका कोई नंबर नहीं था. दिन भर ऑफीस में इंटरनेट पर उसे ढूंढता रहा.
फिर फेसबूक पर एक फ़्रेंड से उसका नंबर मिला. ऑफीस से निकलते ही मैने फ़ोन मिलाया.
'हैलो, कौन?" उधर से एक मीठी आवाज़ आई.
कुछ सेकेंड तक मैं चुप रहा. फिर बोला, "मैं बोल रहा हूँ." 
"मैं कौन?" उसने सवाल किया.
फिर भी मैं चुप रहा. फिर थोड़ी देर बाद उससने बोला, "कौन? रोहित?"
मैने कहा, "हाँ".
शायद अब भी उसे मेरी खामोशी को महसूस करने की आदत थी. मैने कहा, "तुमने तो बीटेक किया था फिर ये सरपंच कैसे?". उसने जवाब दिया," जब तुम्हारा सेलेक्शन IIT में नहीं हो पाया था तो मैने किसी तरह इंजीनियरिंग कर तो लिया पर नौकरी नहीं कर पायी. अब यहीं अपने गाँव में हूँ."
मैने फिर सवाल किया, "और शादी क्यूँ नहीं की?".
वो बस इतना बोल पायी, "क्या फ़ायदा?".
बस इतना कहकर उसने फ़ोन काट दिया.
आज मुझे फिर से उसके प्यार की कमी महसूस हो रही थी.

©नीतिश तिवारी।

Monday, 23 July 2018

बेवफाई का हरजाना।
























उसकी बेवफाई का मुझे हरजाना चाहिए,
उसके जैसा महबूब मुझे रोज़ाना चाहिए।
अभी तुम नादान हो कुछ तज़ुर्बा कर लो,
तुम्हें भी मोहब्बत को कभी आजमाना चाहिए।

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 8 July 2018

गुलाब माँगूंगा।




















मैं महबूब से मोहब्बत का हिसाब माँगूंगा,
उन उलझे हुए सवालों का जवाब माँगूंगा।
मैं जा रहा हूँ उसकी गली में फिर से,
उसकी किताब में रखा हुआ वो गुलाब माँगूंगा।

©नीतिश तिवारी।

Friday, 6 July 2018

Main tumhe bhula du kya...























मैं तुम्हें भूला दूँ क्या
मैं खुद को सज़ा दूँ क्या
तुम्हारे ख़तों की स्याही
अब मिटने लगी है
मैं इन ख़तों को जला दूँ क्या

मेरी आँखों में अब भी
तेरा चेहरा नज़र आता है
मैं अपने घर से आईने 
को हटा दूँ क्या

बेवफ़ा तुम निकली और
इल्ज़ाम हम पर आया
मैं पूरी दुनिया को
ये बात बता दूँ क्या

बहुत मगरूर हैं 
लोग मोहब्बत में
तुम्हारी बेवफाई की 
दास्तान सुनाकर सबको 
नींद से जगा दूँ क्या

मैं तुम्हें भुला दूँ क्या
मैं खुद को सज़ा दूँ क्या

©नीतिश तिवारी।

Friday, 29 June 2018

Mohabbat aur Kejriwal.





















आजकल लोग मुझसे बहुत सवाल पूछ रहे हैं।
लगता है वो मुझे भी केजरीवाल समझ रहे हैं।

मैं तेरी गली में बवाल करना चाहता हूँ।
मैं मोहब्बत में केजरीवाल होना चाहता हूँ।

©नीतिश तिवारी।

Monday, 18 June 2018

रात की तन्हाईयाँ।























रात की तन्हाईयाँ
और तुम्हारी खामोशियाँ
दोनो एक साथ 
मौजूद क्यों हैं।

ये कैसा सितम है
मुझ पर
या कोई ज़ुल्म
किया है हालात ने।

खयालों के ख्वाब
बुनते-बुनते
मैं थक सा गया हूँ
भीड़ में तुम्हें
ढूंढते-ढूंढते
मैं थक सा गया हूँ।

मशाल की तलाश है
पर एक चिंगारी भी
मौजूद नहीं
मैं तुझको कैसे भुला दूँ
ये समझदारी भी
मौजूद नहीं।

©नीतिश तिवारी।