Monday, 18 June 2018

रात की तन्हाईयाँ।















रात की तन्हाईयाँ
और तुम्हारी खामोशियाँ
दोनो एक साथ 
मौजूद क्यों हैं।

ये कैसा सितम है
मुझ पर
या कोई ज़ुल्म
किया है हालात ने।

खयालों के ख्वाब
बुनते-बुनते
मैं थक सा गया हूँ
भीड़ में तुम्हें
ढूंढते-ढूंढते
मैं थक सा गया हूँ।

मशाल की तलाश है
पर एक चिंगारी भी
मौजूद नहीं
मैं तुझको कैसे भुला दूँ
ये समझदारी भी
मौजूद नहीं।

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 17 June 2018

एहसास होता है।















प्यार में हो जब तो ये एहसास होता है,
दूर हो महबूब फिर भी पास होता है।
वक़्त गुजर जाये चाहे सदियाँ बीत जाएं,
एक दिन वो आएंगे बस यही आस होता है।

©नीतिश तिवारी।


Sunday, 10 June 2018

तुम्हारी माँग का सिंदूर।

















ये जो तुम्हारी माँग
में सिंदूर है ना
ये सिर्फ सिंदूर नहीं
बल्कि मेरे जीवन
का दस्तूर है।

और ये तुम्हारी
माथे की बिंदिया
प्रतीक है मेरी
उन्नति का
प्यार में और
जीवन में भी।

ये तुम्हारी सुरमयी
आँखों का काजल
सम्मोहित करता है
तुम्हें जी भरके
निहारने को
बस तुम्हीं में
खो जाने को।

तुम्हारे होठों की लाली
का ऐसा जादू है
कि शब्द कम पड़
जाते हैं तारिफ में
फिर भी मैं 
अपने को कवि
कहता हूँ।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 6 June 2018

तुम भी कभी हमारे थे।

















अकेले दरिया पार किया, मेरा साथी छूटा किनारे पे,
मंज़िल तो छूटनी ही थी, जब रास्ता भटका चौराहे पे।

बिखर गए थे ख्वाब मेरे, पर तुम्ही ने तो सँवारे थे,
याद आता है वो लम्हा, जब तुम भी कभी हमारे थे।

बरसात की बूँदें और तुम्हारे आँसू, दोनों को हमने संभाले थे,
तेरे आँचल की छाँव में, कई लम्हे हमने गुजारे थे।

कभी यकीन ना था कि तुमसे हम बिछड़ जाएंगे,
तेरी मोहब्बत में तुझसे ज्यादा हम खुदा के सहारे थे।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 30 May 2018

Kaun kiska- Zee News BJP ka ya NDTV congress ka?

Kaun kiska- Zee News BJP ka ya NDTV congress ka?














जी हाँ दोस्तों, अगर आप आजकल न्यूज़ चैनलों को देखेंगे तो ऐसा ही लगेगा कि सारे चैनल किसी ना किसी पार्टी से संबंध रखते हैं। आइये शुरुआत ज़ी न्यूज़ से ही करते हैं। इस चैनल को देखकर लगता है कि देश का सबसे बड़ा राष्ट्रवादी चैनल बस यही है। इसके सबसे बड़े एंकर में से एक सुधीर चौधरी का अगर बस चले तो ये आज ही पाकिस्तान पर हमला करके उसे भारत में मिला दें। आइये अब बात करते हैं NDTV की। इस चैनल पर हमेशा ये आरोप लगता है कि ये वामपंथियों और कांग्रेसियों का चैनल है। इस चैनल के दो सबसे बड़े चर्चित एंकर बरखा दत्त और रविश कुमार हैं। बरखा मैडम के interview लेने की कला पर अगर आप गौर करेंगे तो पता चलेगा कि दुनियाँ के सारे नकारात्मक और विवादित सवाल सिर्फ इनके दिमाग में ही आते हैं। इन्हें ऐसा लगता है कि विवाद पैदा करना मिडिया का जन्मसिद्ध अधिकार है। अरे भईया TRP का भी मसला है। अब बात करते हैं रविश कुमार की। ये भी बहुत चर्चित रहते हैं। कभी अपने ब्लॉग के लिए तो कभी अपने फेसबुक पोस्ट के लिए। इनको इस बात का सबसे बड़ा मलाल है कि मोदी जी इनको interview नहीं दे रहे हैं। भाई साहब जब आप देश विरोधी नारे लगाने वाले कन्हैया का interview लेने में सबसे आगे रहोगे तो आपको मोदी जी के interview की क्या जरूरत है। 
अपने आप को मीडिया जगत के धुरंधर मानने वाले दो और लोग हैं। पहला नाम है अर्नब गोस्वामी का और दूसरा नाम है अमीश देवगन का। इन दोनों का ज़िक्र मैं एक साथ इसलिए कर रहा हूँ क्योंकि दोनों लगभग जुड़वा भाई लगते हैं। शक्ल से नहीं बल्कि इनके डिबेट करने के अंदाज़ से। इन दोनों के कार्यक्रम को डिबेट नहीं, डिजिटल अखाड़ा का नाम दिया जाए तो गलत नहीं होगा। हाँ,मतलब कार्यक्रम में प्रवक्ता को बुलाकर उसकी बेज्जती करना कोई इनसे सीखे। अर्नब गोस्वामी तो चिल्लाने के मामले में सन्नी देओल को भी पीछे छोड़ देते हैं। 
एक और साहब हैं जिनका नाम है- पुण्य प्रसून वाजपेयी। ये भी मोदी जी का interview लेना चाहते हैं पर इनको भी रविश कुमार की तरह अभी तक सफलता नहीं मिली है। इसलिए ये समय- समय पर दूसरे शायरों की शायरी के जरिए ट्वीट करके मोदी सरकार पर कटाक्ष करते रहते हैं। 

बस, अब ज्यादा नहीं लिखूंगा नहीं तो ये तमाम लोग मेरे खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर देंगे। और मुझे तो केजरीवाल की तरह माफी माँगना भी नहीं आता।
पोस्ट पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। आगर आपको ये पोस्ट अच्छी लगी हो तो शेयर कीजिए।

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 15 May 2018

मेंहदी किसी और के नाम की।

















चाहे लाख मेहंदी लगा ले किसी और के नाम की,
तेरे हांथों की लकीरों से अब मैं नहीं मिटूँगा ।

नफरतों का दौर तो तुम्हारे शहर में होता होगा,
हमारे यहाँ तो आम भी पत्थर से नहीं हाथ से तोड़ते हैं।

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 6 May 2018

बरस रही हो तुम।
























बिखरी ज़ुल्फ़ों में भी सँवर रही हो तुम,
शायद मेरे रूप से और निखर रही हो तुम,
जब से तुम्हें देखा है सारी प्यास मिट गयी,
बिना बादल के भी बरस रही हो तुम।
©नीतिश तिवारी।

Saturday, 5 May 2018

जिन्ना-जिन्ना करते हो तुम...
























जिन्ना- जिन्ना करते हो तुम, तुमको चाहिए आज़ादी,
भगत सिंह जो फाँसी पर चढ़े वो बोलो फिर क्या थी।

देश में रहकर देशद्रोही बनते फिरते हो तुम,
ये अब काम किसी और के इशारे पर करते हो तुम।

सालों पहले देश बँट गया तुम जैसे लोगों के कारण,
इस बार देश नहीं बंटेगा चाहे कर लो कितने जतन।

पढ़ने की जगह पर तुम सिर्फ नारे लगाने जाते हो,
भारत में रहकर तुम क्या पाकिस्तान का खाते हो।

कितना भी तुम चिल्ला लो, इन नारों में वो बात नहीं,
बाहरी आदमी देश बँटवा दे उसकी अब औकात नहीं।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 2 May 2018

एहतराम किया।
























तुम्हारी खामोशियों का एहतराम किया है मैंने,
अपनी ग़ज़ल को भी तेरे नाम किया है मैंने।

अपनी पलकों से आँसू को निकलने ना दिया,
अपने जज़्बात को तेरा गुलाम किया है मैंने।

यूँ तो बर्बाद हो गया मैं तेरी मोहब्बत में लेकिन,
फ़कीरी में भी दाना-पानी का इंतज़ाम किया है मैंने।

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 29 April 2018

बदनाम शायर।























इतना आसान भी नहीं है मोहब्बत की दास्तान लिखना,
अच्छे भले आदमी को बदनाम शायर बनना पड़ता है।

कुछ भी हो जाए तुम एक बार मोहब्बत जरूर करना,
गम को छुपाकर मुस्कुराने की अदा सीख जाओगे।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 18 April 2018

गले लग जाती हो।























लफ्ज़ भी गुलाम हो जाते हैं मेरे,
जब तुम अपना बनाने का इशारा करती हो।
धड़कनों को हर बार सुकून मिल जाता है,
जब तुम चुपके से आकर गले लग जाती हो।

@नीतिश तिवारी।

Thursday, 5 April 2018

भीगी सिगरेट और इश्क़.




कभी आईने को देखें फिर तुम्हें निहारें,
मोहब्बत में हम खुद को कैसे संभालें.

तेरे इश्क़ में भीगे हुए सिगरेट सा हो गया हूँ,
आ मुझे अपनी बाहों की गर्मी से सुलगा दे.

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 3 April 2018

Got married.




पिछले कुछ दिनों से अत्यधिक व्यस्तता के कारण आप सभी से मुख़ातिब नहीं हो पाया। दिनांक 10 मार्च 2018 को विवाह सम्पन्न हुआ। परम पिता परमेश्वर का धन्यवाद। 
ज्यादा कुछ ना कहते हुए बस कुछ पंक्तियाँ अपनी अर्धांगिनी के लिए।

ये पल बहुत खूबसूरत है, 
इसमें तुम जो हो।
शुक्रिया तुम्हारा मेरी अर्धांगिनी बनने के लिए।

Nitish.

Sunday, 18 March 2018

इनाम मिला है.






बरसों की तड़प का मुझे इनाम मिला है,
इश्क़ में आज मुझे एक मुक़ाम मिला है.

थोड़ा सब्र का लेता तो मुक़ाम भी मिल जाता,
उसकी बेवफाई का मुझे इंतकाम भी मिल जाता।

©नीतिश तिवारी।

Thursday, 1 March 2018

व्यंग--गुलाल, कंगाल, मालामाल।
























किसी ने रंग उड़ाये, किसी ने गुलाल,
नीरव मोदी पैसा उड़ाया, बैंक हुआ कंगाल।

शौचालय,बिजली,घर से किया सबको मालामाल,
सब जगह मोदी जी छाये, कांग्रेस का हुआ खस्ता हाल।

लालू जी की बेल हुई है नामंजूर,
और होली में रहेंगे अपने घर से दूर।

केजरीवाल ने कुमार विश्वाश को दिखाई ऐसी सुनामी,
बन गए वो राजनीति में सबसे कम उम्र के आडवाणी।

होली में भाभी बनाएं मालपुआ, लेकिन हमरा चाही रसपुआ,
बड़कन के लिहीं आशीर्वाद, छोटकन के दिहीं हम दुआ।

होली की शुभकामनाओं के साथ,
आपका 
©नीतिश तिवारी।