Tuesday, 30 May 2017

शायरी आपके लिए।






तुझको चाहा तो मैंने मगर पा ना सका,
तेरी आँखों की दरिया में डुबकी लगा ना सका,
तुम्हे मेरी ज़िन्दगी के उजाले से नफरत थी,
चारों तरफ अंधेरा था, मैं तेरे पास आ ना सका।

तेरे चेहरे की रंगत को मैं पा भी ना पाया,
और इस दर्द की दवा को मैं ला भी ना पाया।

तुझे फुर्सत मिले तो कभी याद कर लेना,
ज़िंदा हो चुका हूँ, फिर से बर्बाद कर लेना।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 17 May 2017

चाँदनी के लिए।




मुझे कभी ऊंचाइयों से गिराने की कोशिश मत करना,
मैं एक सितारा हूँ, हमेशा चमकता रहूँगा।
और अगर कभी आसमान में नज़र नहीं आया तो,
समझ लेना, अमावश का चाँद बन गया हूँ, चाँदनी के लिए।

©नीतिश तिवारी


Thursday, 20 April 2017

मेहंदी--मोहब्बत वाली।















तेरे हाथों में मेहंदी,
जो मेरे नाम की थी,
तेरे हाथों से वो,
शायद मिट गयी होगी।
लेकिन मेरे साँसों में,
उस मेहंदी की महक,
ज़िन्दा है आज भी।

वो लाल रंग सिर्फ,
मेहंदी का रंग नहीं था।
मेरी बेरंग जिंदगी का,
एक प्यारा सा उमंग था।

तेरी खूबसूरत हाथों में रची,
उस महकती मेहंदी को,
आज भी देखता रहता हूँ।
बस इसी इंतज़ार में,
एक दिन फिर से,
तुम रचाओगी वो मेहंदी,
अपने साजन के लिए।

©नीतिश तिवारी।

Monday, 10 April 2017

अधूरी हसरतें।















मेरी अधूरी ख्वाहिशें अब भी तुम पर उधार हैं,
सारी हसरतें अधूरी हैं, अब भी तुमसे प्यार है।


मेरी तमन्नाओं की कसक को आज पूरा हो जाने दो,
आज चाँदनी रात है, थोड़ा सा तो बहक जाने दो।

©नीतिश तिवारी।

Saturday, 4 March 2017

अधूरा पैमाना।












कोई बच नहीं सकता इस मोहब्बत की बीमारी से,
बस एक पैमाना अधूरा रह जाता है होठों की अदाकारी से,

यूँ नादान बने रहने का समय अब नहीं रहा,
तुम पास तो आओ, कुछ हरकतें करते हैं।

©नीतिश तिवारी।



Thursday, 26 January 2017

मेरा वज़ूद।












मुझको मेरे वज़ूद का होना अब खलता है,
पर ऐसे ही तो ज़िन्दगी का खेल चलता है।

आज मौजूद नहीं है हीरे को तराशने वाला जौहरी,
ये कौन सा दौर है जिसमें शीशा भी पिघलता है।

लोग तो बहुत मिलते हैं सफर में हमसफर बनने वाले,
पर मुश्किल हालात में कहाँ कोई साथ चलता है।

ख्वाहिशों की बलि देकर ज़िन्दगी को संवारा है मैंने,
पर मंज़िल पाने को अब भी ये दिल मचलता है।

मैं किसे चाहूँ, किसके लिए अब सज़दा करूँ,
ये वक़्त भी मतलबी हो गया, हर पल बस बदलता है।


©नीतिश तिवारी।


Monday, 23 January 2017

इश्क में गुनाह।















इश्क़ में उसने कुछ ऐसा गुनाह कर दिया,
मुझको कैद करके खुद को आज़ाद कर दिया,
मैं उसकी जुल्फों की घनी चादर में खुद को छिपाता रहा,
उसकी कातिल अदा ने मेरी तबियत नासाज़ कर दिया।

©नीतिश तिवारी।

Thursday, 12 January 2017

एक उम्मीद फिर से।






कैसे उसके दिल में अपना प्यार जगाऊँ फिर से,
कैसे उसके दिल में नयी आरज़ू जगाऊँ फिर से,
वो कहती है मोहब्बत अब ख़त्म हो चुकी है ,
कैसे अपनी मोहब्बत को वापस लाऊँ फिर से। 

©नीतिश तिवारी

Monday, 9 January 2017

हया वाली अदा।




तेरी हया वाली अदा को सलाम हम करेंगे,
तुम लिखना अपनी दास्तान कलाम हम पढ़ेंगे,
तुम मानो या ना मानो मोहब्बत तो अब हो ही गयी है,
बनकर रह जाएंगे कहानी या नया इतिहास हम लिखेंगे।

©नीतिश तिवारी


Monday, 26 December 2016

प्रेम-गीत।


















मैं निश्छल प्रेम की परिभाषा को आज करूँगा यथार्थ प्रिय,
ये प्रेम मेरा भवसागर है, इसमें नहीं है कोई स्वार्थ प्रिय।

मेरा जी करता है हर रोज मैं तुमसे, करूँ एक नया संवाद प्रिय,
कोई मतभेद नहीं कोई मनभेद नहीं, इसमें नहीं कोई विवाद प्रिय।

उलझन भरी इस राह में तुम सुलझी हुई एक अंदाज़ प्रिय,
मेरा रोम-रोम पुलकित हो जाता, कर रहा हूँ प्रेम का आगाज़ प्रिय।

तुम नदी के तेज़ धारा जैसी एक चंचल सी प्रवाह प्रिय,
रोज करता हूँ वंदन प्रभु से, तुमसे ही हो मेरा विवाह प्रिय।

©नीतिश तिवारी।

Thursday, 15 December 2016

मोहब्बत का दीवाना।















चाहतों की दुनियाँ में मोहब्बत का दीवाना हूँ मैं,
इस जलती बस्ती में अकेला बचा आशियाना हूँ मैं,
तेरे दिल की दुनियाँ का सबसे कीमती खज़ाना हूँ मैं,
तुम जो कह ना पायी उन होठों का फ़साना हूँ मैं।

©नीतिश तिवारी।

Friday, 11 November 2016

Love, break up, zindgi.



"If we aren't able to understand each other, we should end our relationship." Priyanka said with tears in her eyes.

Nilesh was shocked! He had no idea what she was talking about. Nilesh and Priyanka were in relationship for more than three years. And one day Priyanka called and said that she wants to end the relationship.
They had some arguments last night at dinner. But that was not the reason behind Priyanka's sadness. They were good match, in fact a perfect one. Both were working professionals.

Since Priyanka wanted to end the relationship. Nilesh replied her with a long WhatsApp message:-
"Dear Priyanka,
I hardly managed to type this message for you. I don't know why you have decided to leave me. And I won't ask you any explanation regarding your decision. But let me tell you one thing that I love you from first day we met and will continue loving you till last day of my life.
Everyours 
Nilesh."

And then beautiful love story has ended. Neither Nilesh nor Priyanka asked explanation from each other. Because they knew they still love each other. 

Sometimes we need to give a special 'tag' to our relationship and that is called 'break up'. Yes my friends this happens. And still life continues...

©Nitish Tiwary.




Thursday, 27 October 2016

नया किरदार बनके उभरा हूँ मैं ।
















मुझे आशिकी की लत् तो नहीं थी।
बस खो गए थे तेरी निगाहों में।।

वो सफर भी कितना हसीन था।
जब सो गए थे हम तेरी बाहों में।।

वक़्त गुजरा मोहब्बत मुक्कमल हुई।
मेरी साँस घुल गयी थी तेरी साँसों में।।

बड़ी आसान लगने लगी मंज़िल मेरी।
तूने मखमल जो बिछाये मेरी राहों में।।

फुर्सत नहीं मुझे दिल्लगी से अब।
हर वक़्त रहता हूँ तेरे खयालों में।।

नया किरदार बनके उभरा हूँ मैं अब।
क्या खूब तराशा है तूने मुझे।।

©नीतिश तिवारी।

Monday, 10 October 2016

प्यार, इकरार और बेवफा यार।























दस्तक जो हुई उसकी मेरे दर पर यूँ अचानक से,
धड़कन बढ़ने लगी मेरी उसकी आँखों की शरारत से,
मोहब्बत की ऐसी लागी है लगन की मचल उठा है मेरा मन,
इबादत मेरी पूरी हुई अब खुदा की इनायत से।

इन गिरते हुए आंसुओं से अपने दामन को बचाऊँ कैसे,
ज़ख्म जो तूने दिया है मोहब्बत में उसे दिखाऊँ कैसे,
कभी आरज़ू नहीं की मैंने बादशाह बनने की,
इस मोहब्बत में फ़कीरी की दास्तान सुनाऊँ कैसे।

फिर से आ जाओ बेवफाई का तीर लेकर,
मोहब्बत के जंग में मैं निहत्थे उतरा हूँ।

©नीतिश तिवारी।


Saturday, 1 October 2016

हमें नहीं आता...




















अपनी हसरतों पर लगाम लगाने हमें नहीं आता,
उसकी मोहब्बतों का कलाम सुनाने हमें नहीं आता।

कश्ती अगर साथ छोड़ दे जिसका बीच भँवर में,
ऐसे समंदर को सलाम करने हमें नहीं आता।

जलते हुए खूबसूरत चिराग को बुझाने हमें  नहीं आता,
किसी के घर की रौशनी को मिटाने हमें नहीं आता।

पर्दे के पीछे यूँ सियासत करने हमें नहीं आता,
चुपके से महबूबा का घूँघट उठाने हमें नहीं आता।

पैमाने के ज़ाम को आधा छोड़ देना हमें नहीं आता,
मयखाने में यूँ अकेले महफ़िल जमाना हमें नहीं आता।

देखिए ना, सफ़र में कितनी धूप है, छाँव का नामो निशान नहीं,
बिना काँटों के मंज़िल तक पहुँचना हमें  नहीं आता।

©नीतिश तिवारी।