Saturday, 21 March 2015

जुल्फों के नज़ारे बहुत हैं.















आसमाँ में तारे बहुत हैं,
मेरे लिए सहारे बहुत हैं.
तुझे क्या खबर ओ ज़ालिम,
तेरी जुल्फों के नज़ारे बहुत हैं. 


©नीतीश तिवारी 

4 comments:

  1. भारतीय नववर्ष एवं नवरात्रों की हार्दिक मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (23-03-2015) को "नवजीवन का सन्देश नवसंवत्सर" (चर्चा - 1926) पर भी होगी!
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    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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