Sunday, 4 January 2015

ये तेरा रूप, ये तेरा श्रृंगार .












ये तेरा रूप ही तो है,
जिसे मैं बार-बार निहारता हूँ. 
तेरे चेहरे की ये लालिमा,
जब मेरे आँखों मे ओझल हो जाती हैं। 


तो हर बार बहक जाता हूँ मैं,
एक नये अरमान के लिए,
एक खूबसूरत अंज़ाम की तरफ.
और महसूस करता हूँ मैं,











तेरे बदन की खुश्बू
जो मदहोश कर देती है मुझे,
एक पल,हर पल ,हर लम्हा.
और बेकरार रहता हूँ मैं,
तुझे पाने के लिए,
तुझे हर बार निहारने के लिए.

नीतीश तिवारी





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