Sunday, 9 November 2014

वाह क्या बात है!





















सुंदर वन
चंचल चितवन,
और
तुम्हारा ये भोलापन.
वाह क्या बात है!

होठों पर लाली,
तेरी चाल मतवाली,
और
मेरा जेब खाली.
वाह क्या बात है!

आँखों में सूरमा,
चेहरे पर बुर्क़ा,
और
मेरा फटा कुर्ता.
वाह क्या बात है!

बड़ा है लाजवाब,
तेरा दिलकश अंदाज़,
और 
मुझको कर दे बर्बाद.
वाह क्या बात है!

जाने क्या थी बात,
जो तूने छोड़ा साथ,
और
जागा मैं सारी रात.
वाह क्या बात है!

लिखती है कहानी,
तेरी अल्हड़ जवानी,
और
हुई मेरी बदनामी.
वाह क्या बात है! 

मस्त है ना! तो सोच क्या रहे हैं शेयर कीजिए ना...

शुभकामनाओं के साथ
नीतीश तिवारी

4 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (10-11-2014) को "नौ नवंबर और वर्षगाँठ" (चर्चा मंच-1793) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच के सभी पाठकों को
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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