Thursday, 5 December 2013

आज फिर खयाल आया।




आज फिर खयाल आया कि कुछ पैगाम लिखूँ ,
लब पर तेरा नाम लिखूँ  या तुझे अपनी जान लिखूँ। 

आज फिर खयाल आया कि कुछ सौगात लिखूँ ,
नींदों में बसे ख्वाब लिखूँ या तेरी कही हर बात लिखूँ। 

आज फिर खयाल आया कि कुछ तहरीर  लिखूँ ,
परदे के पीछे कि तस्वीर लिखूँ  या अपनी रूठी तकदीर लिखूँ। 

आज फिर खयाल आया कि कुछ अंज़ाम  लिखूँ ,
उस महफ़िल की वो ज़ाम लिखूँ  या दुनिया का इल्ज़ाम लिखूँ। 

7 comments:

  1. http://hindibloggerscaupala.blogspot.in/ के शुक्रवारीय ६/१२/१३ अंक में आपकी रचना को शामिल किया जा रहा हैं कृपया अवलोकनार्थ पधारे ............धन्यवाद

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  2. सुंदर रचना के लिए आपको बधाई

    संजय भास्‍कर
    शब्दों की मुस्कुराहट
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद सर

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  3. बहुत खुबसूरत रचना नीतिश जी !
    नई पोस्ट वो दूल्हा....
    latest post कालाबाश फल

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  4. प्रशंसनीय प्रस्तुति

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