Sunday, 14 June 2015

Mountain Dew में से निकला कचरा.


 Mountain Dew का टैग लाइन है डर के आगे जीत है. मतलब इसको पीने से आप लाइफ में जीतेंगे ही जीतेंगे लेकिन कल अगर मैं इसे पी लेता तो जीतने की बात तो छोड़ दीजिए, शायद मैं हारने के भी काबिल नही रहता.

















जी हाँ कल जब मैं Mountain Dew जैसे ही पीने वाला था देखा की इसमे तो कुछ कचरा है. ये फोटो उसी बोतल की है जिसे मैं पीने वाला था.ध्यान से देखिए आपको कुछ नज़र आएगा. वो तो मेरी आदत है क़ि मैं ढक्कन खुलने के बाद देख कर पीता हूँ इसलिए मैं बच गया और फिर उसे फेकना पड़ा. जाहिर सी बात है मुझे नुकसान हुआ ना सिर्फ़ रुपये का बल्कि उस विश्वास का जो इतने दिनो से इस ब्रांड के प्रति बना हुआ था.

जब कभी टीवी पर आता था क़ि सॉफ्ट ड्रिंक्स में कीड़ा निकला या छिपकीली निकली या कई लोग मुझे मना करते थे पीने से तो विश्वास ही नही होता था क़ि ऐसा कैसे हो सकता है. मतलब multinational brand जिसका अरबों रुपये का टर्न ओवर हो उसे बनाने wale ऐसी ग़लती कैसे कर सकते हैं.

जीतने भी सॉफ्ट ड्रिंक्स हैं चाहे वो पेप्सीको का हो या कोक का उन सबमे mountain dew मेरा फ़ेवरेट था लेकिन अब मैं सॉफ्ट ड्रिंक्स नही पीऊंगा.
ये तो वही वाली बात हो गयी की कई साल से आप अपनी बेहद ही खूबसूरत गर्लफ़्रेंड से बेपनाह मोहब्बत कर रहे हो और अचानक आपको पता चलता है कि वो तो किसी और की अमानत है. मतलब ना कुआँ ना खाई डाइरेक्ट बेवफ़ाई. बिल्कुल ऐसी ही फीलिंग मुझे इस घटना के बाद हुआ.

फिर मैं  कहाँ चुप रहने वाला था. मैने तुरंत पेप्सिको के कस्टमर केयर 1800224020 पर कॉल किया. कॉल करने पर सुनाई देता है कि अपना voice मैसेज छोड़िए अपने नाम पता और फ़ोन नंबर के साथ अरे भाई कस्टमर केयर डाइरेक्ट हेल्प के लिए होता है कि Girl friend तरह बेवकूफ़ बनाने के लिए.ये तो वही वाली बात हो गयी की आप किसी लड़की को फ़ोन करें तो आपको सुनाई देता है, "hi I am julie I can't talk right now please leave the message after beep." खैर मैने मैसेज record करवा के छोड़ दिया लेकिन किसी से बात नही हुई. अब मैने Gurgaon  ऑफीस फ़ोन किया लेकिन वहाँ भी कुछ हल नही निकला.मैं किसी के पसंद को तो बदल नही सकता लेकिन इतना ज़रूर है की अपनी पसंद को तो बदल ही सकता हूँ. इसलिए अब से NO TO SOFT DRINKS.


मेरी आप सभी पढ़ने वालों से गुज़ारिश है की इस पोस्ट को शेयर करके हक़ीकत से सबको रूबरू कराईए. मेरे इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद.


©नीतीश तिवारी


2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (15-06-2015) को "बनाओ अपनी पगडंडी और चुनो मंज़िल" {चर्चा अंक-2007} पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  2. aapka bahut bahut dhnywaad sir ji.

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