Sunday, 4 November 2018

ख्वाब ज़िन्दगी के।


















रात को नींद नहीं आती,
दिन को ख्वाब नहीं आते।
ये कैसे सवाल हैं तुम्हारे,
जिनके हमें जवाब नहीं आते।

अँधेरा छँट गया तो उजाला हो जाएगा,
मोम ज्यादा पिघला तो ज्वाला हो जाएगा।
ये सोचकर बाप रोज मजदूरी करता है कि,
भूखे बच्चे का एक निवाला हो जाएगा।

©नीतिश तिवारी।

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