Sunday, 10 September 2017

बेबसी - लघुकथा।














रमेश वैसे तो काम करने में मेहनती आदमी था। लेकिन कुछ समय से बॉस उसके काम में रोज़ गलतियाँ निकाल रहा था। आखिरकार वो दिन भी आ गया जब रमेश को उसके बॉस ने नौकरी से निकाल दिया।

थका हारा रमेश शाम को अपने घर पहुंचता है।
रमेश ने पत्नी से कहा, "एक ग्लास पानी देना"।
पत्नी ने जवाब दिया, "खुद ही ले लीजिये फ्रिज में रखा है"।
हालाँकि रमेश का मूड ठीक नहीं था फिर भी उसने प्यार से पत्नी से पूछा,"ऐसे जवाब क्यों दे रही हो?"
पत्नी ने जवाब दिया, "अभी मम्मी का फोन आया था, वो पूछ रही थीं कि दामाद जी ने शादी के समय तुम्हे नेकलेस दिलाने का वादा किया था उसका क्या हुआ। मैं मम्मी को जवाब नहीं दे पायी।
शादी को एक साल हो गया और अभी तक  आपने नेकलेस नहीं दिलवाया।"
पत्नी की बातों को सुनकर रमेश स्तब्ध था।
पत्नी की नज़रें जवाब के इंतज़ार में उसके चेहरे पर टिक गयी थी।


©नीतिश तिवारी।

Thursday, 7 September 2017

अखबार बन जाऊँगा।














तेरी डूबती कश्ती का पतवार बन जाऊँगा,
तेरी मोहब्बत का कर्जदार भी बन जाऊँगा,
आज जी भर के मुझे प्यार कर लो,
नहीं तो कल सुबह का अख़बार बन जाऊँगा।

©नीतिश तिवारी।

Monday, 4 September 2017

नकाब में आये हैं।














ज़ख्मों को सीने का तरीका सीख रहा हूँ,
अपनों से मिलने का सलीका सीख रहा हूँ।
मोहब्बत और दर्द को तो साथ रहने की फितरत है,
इन्हें जो अलग कर दे वो मसीह ढूंढ रहा हूँ।

आज मेरी आँखों में रौशनी आयी है,
आज वो मिलने नक़ाब में आये हैं,
फुर्सत से बात करने का इरादा था मेरा,
आज वो पीकर शराब बेहिसाब आये हैं।

©नीतिश तिवारी।