Thursday, 12 January 2017

एक उम्मीद फिर से।






कैसे उसके दिल में अपना प्यार जगाऊँ फिर से,
कैसे उसके दिल में नयी आरज़ू जगाऊँ फिर से,
वो कहती है मोहब्बत अब ख़त्म हो चुकी है ,
कैसे अपनी मोहब्बत को वापस लाऊँ फिर से। 

©नीतिश तिवारी

2 comments:

  1. बहुत खूब ... सुन्दर मुक्तक ...

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    1. आपका शुक्रिया।

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