Saturday, 25 June 2016

लो अच्छे दिन आ गए।










क़र्ज़ में डूबा किसान,
इंसान बना अब हैवान,
सो रहे हैं हुक्मरान,
लो अच्छे दिन आ गए।

जी भर के की मैंने पढ़ाई,
मास्टर डिग्री भी मैंने पाई,
पर नौकरी नहीं मिली भाई,
लो अच्छे दिन आ गए।

महंगाई का हुआ है ऐसा हाल,
थाली से गायब हुए सब्ज़ी दाल,
जनता किससे करे जवाब सवाल,
लो अच्छे दिन आ गए।

नेता को काम की फिक्र नहीं,
चुनावी वादों का कोई जिक्र नहीं,
हो रही है डिग्री की पड़ताल,
लो अच्छे दिन आ गए।

लोग तो हर साँस में बसे थे,
मैं भी उनकी खुशबू बन गया था,
एक आईना टूटा सब बिखर गया,
लो अच्छे दिन आ गए।

©नीतिश तिवारी।

Friday, 24 June 2016

Come, let's do love.



The shining stars are saying,
The singing birds are saying,
Come, let's do love.

No matter how far we are,
No matter how world see us,
Come, let's do love.

Imagination is something,
Where you reside.
Affection is something,
Where I survive.

This world is full of beauties,
But my world is only you.
In every single beates of my heart,
The one who exists is only you.

Every rays of sun is saying,
Every drops of rain is saying,
Come, let's do love.

©Nitish Tiwary.

Sunday, 19 June 2016

कुछ बातें हैं दिल में।









कुछ बातें हैं दिल में,
जिनको मैं बताना चाहता हूँ।
पर कोई नहीं मिलता सुनने वाला,
इसलिए लिख देना जानता हूँ।

कुछ वादें, कुछ कसमें, कुछ गीत, कुछ नज़्में,
याद करना चाहता हूँ, गुनगुनाना चाहता हूँ।
उन सूनी गलियों में भी ना जाने क्यों,
मैं एक रात बिताना चाहता हूँ।

बुझते दिये की लौ जलाना चाहता हूँ,
सूखे पत्तों को हरा बनाना चाहता हूँ।
इस अंजुमन में जो बिखरे से हालात हैं,
मैं उस हालात को सँवारना चाहता हूँ।

तेरे खाली जीवन में रंगों को भरना चाहता हूँ,
तेरे बासी किरण में भोर को देखना चाहता हूँ।
ये जो उलझी ज़ुल्फ़ों की काली घटाएँ हैं ना,
इन काली घटाओं से बारिश को देखना चाहता हूँ।

©नीतिश तिवारी।

Friday, 10 June 2016

तुम पर ऐतबार हुआ।













वक़्त ने क्या खूब हमें रुलाया है।
बड़ी देर से हम दोनों को मिलाया है।।

तुम पतझड़ में सावन के लिए बेकरार थी।
मैं रेगिस्तान में बारिश का तलबगार था।।

आग सीने में लगी थी जो तुम्हारे।
दिल मेरा क्यों ये जल रहा था।।

मोहब्बत की तड़प थी ये कैसी जो।
बिना लौ के ये मोम पिघल रहा था।।

पर बरसों की दूरी को अब हम मिटायेंगे।
दुनिया से छीनकर तुम्हे अपना बनाएंगे।।

तुम शिकवा करो हम शिकायत करेंगे।
तुम रूठा करो हम मनाया करेंगे।।

खुशनसीब हूँ मैं जो आज तेरा दीदार हुआ।
सज़दे जो बरसों मैंने किये उस पर ऐतबार हुआ।।

©नीतिश तिवारी।