Monday, 26 December 2016

प्रेम-गीत।


















मैं निश्छल प्रेम की परिभाषा को आज करूँगा यथार्थ प्रिय,
ये प्रेम मेरा भवसागर है, इसमें नहीं है कोई स्वार्थ प्रिय।

मेरा जी करता है हर रोज मैं तुमसे, करूँ एक नया संवाद प्रिय,
कोई मतभेद नहीं कोई मनभेद नहीं, इसमें नहीं कोई विवाद प्रिय।

उलझन भरी इस राह में तुम सुलझी हुई एक अंदाज़ प्रिय,
मेरा रोम-रोम पुलकित हो जाता, कर रहा हूँ प्रेम का आगाज़ प्रिय।

तुम नदी के तेज़ धारा जैसी एक चंचल सी प्रवाह प्रिय,
रोज करता हूँ वंदन प्रभु से, तुमसे ही हो मेरा विवाह प्रिय।

©नीतिश तिवारी।

Thursday, 15 December 2016

मोहब्बत का दीवाना।















चाहतों की दुनियाँ में मोहब्बत का दीवाना हूँ मैं,
इस जलती बस्ती में अकेला बचा आशियाना हूँ मैं,
तेरे दिल की दुनियाँ का सबसे कीमती खज़ाना हूँ मैं,
तुम जो कह ना पायी उन होठों का फ़साना हूँ मैं।

©नीतिश तिवारी।

Friday, 11 November 2016

Love, break up, zindgi.



"If we aren't able to understand each other, we should end our relationship." Priyanka said with tears in her eyes.

Nilesh was shocked! He had no idea what she was talking about. Nilesh and Priyanka were in relationship for more than three years. And one day Priyanka called and said that she wants to end the relationship.
They had some arguments last night at dinner. But that was not the reason behind Priyanka's sadness. They were good match, in fact a perfect one. Both were working professionals.

Since Priyanka wanted to end the relationship. Nilesh replied her with a long WhatsApp message:-
"Dear Priyanka,
I hardly managed to type this message for you. I don't know why you have decided to leave me. And I won't ask you any explanation regarding your decision. But let me tell you one thing that I love you from first day we met and will continue loving you till last day of my life.
Everyours 
Nilesh."

And then beautiful love story has ended. Neither Nilesh nor Priyanka asked explanation from each other. Because they knew they still love each other. 

Sometimes we need to give a special 'tag' to our relationship and that is called 'break up'. Yes my friends this happens. And still life continues...

©Nitish Tiwary.




Thursday, 27 October 2016

नया किरदार बनके उभरा हूँ मैं ।
















मुझे आशिकी की लत् तो नहीं थी।
बस खो गए थे तेरी निगाहों में।।

वो सफर भी कितना हसीन था।
जब सो गए थे हम तेरी बाहों में।।

वक़्त गुजरा मोहब्बत मुक्कमल हुई।
मेरी साँस घुल गयी थी तेरी साँसों में।।

बड़ी आसान लगने लगी मंज़िल मेरी।
तूने मखमल जो बिछाये मेरी राहों में।।

फुर्सत नहीं मुझे दिल्लगी से अब।
हर वक़्त रहता हूँ तेरे खयालों में।।

नया किरदार बनके उभरा हूँ मैं अब।
क्या खूब तराशा है तूने मुझे।।

©नीतिश तिवारी।

Monday, 10 October 2016

प्यार, इकरार और बेवफा यार।























दस्तक जो हुई उसकी मेरे दर पर यूँ अचानक से,
धड़कन बढ़ने लगी मेरी उसकी आँखों की शरारत से,
मोहब्बत की ऐसी लागी है लगन की मचल उठा है मेरा मन,
इबादत मेरी पूरी हुई अब खुदा की इनायत से।

इन गिरते हुए आंसुओं से अपने दामन को बचाऊँ कैसे,
ज़ख्म जो तूने दिया है मोहब्बत में उसे दिखाऊँ कैसे,
कभी आरज़ू नहीं की मैंने बादशाह बनने की,
इस मोहब्बत में फ़कीरी की दास्तान सुनाऊँ कैसे।

फिर से आ जाओ बेवफाई का तीर लेकर,
मोहब्बत के जंग में मैं निहत्थे उतरा हूँ।

©नीतिश तिवारी।


Saturday, 1 October 2016

हमें नहीं आता...




















अपनी हसरतों पर लगाम लगाने हमें नहीं आता,
उसकी मोहब्बतों का कलाम सुनाने हमें नहीं आता।

कश्ती अगर साथ छोड़ दे जिसका बीच भँवर में,
ऐसे समंदर को सलाम करने हमें नहीं आता।

जलते हुए खूबसूरत चिराग को बुझाने हमें  नहीं आता,
किसी के घर की रौशनी को मिटाने हमें नहीं आता।

पर्दे के पीछे यूँ सियासत करने हमें नहीं आता,
चुपके से महबूबा का घूँघट उठाने हमें नहीं आता।

पैमाने के ज़ाम को आधा छोड़ देना हमें नहीं आता,
मयखाने में यूँ अकेले महफ़िल जमाना हमें नहीं आता।

देखिए ना, सफ़र में कितनी धूप है, छाँव का नामो निशान नहीं,
बिना काँटों के मंज़िल तक पहुँचना हमें  नहीं आता।

©नीतिश तिवारी।

Monday, 26 September 2016

तेरी तस्वीर से।
























मेरी चाँद को घेर लिया फलक के सितारों ने,
मेरी नींद को तोड़ दिया जुल्फ के बहारों ने,
कभी नवाज़िश महबूब की तो कभी इबादत खुदा की,
मेरी ज़ीस्त को रोक दिया हालात के दीवारों ने।

वाकिफ तो था मैं इस दुनिया की दस्तूर से,
वफ़ा की उम्मीद कर बैठे हम एक मगरूर से,
ऐसा क्या हुआ जो एक पल में ठुकरा कर चली गयी,
बस पूछता रहता हूँ मैं तेरी तस्वीर से।

©नीतिश तिवारी

Monday, 19 September 2016

इतिहास बनाने को तैयार बैठे हैं।

















सुन ले बेटा पाकिस्तान,
बाप है तेरा हिन्दुस्तान।
मत भूल अपनी औकात वरना,
बन जायेगा तू कब्रिस्तान।

खैरात की दौलत को तूने अपना मान रखा है,
नेहरू गांधी के एहसानों को भुलाकर बैठा है।
कश्मीर का राग अलापने को आतंकवादी पाल रखा है,
हाफ़िज़ सईद को तूने दामाद बना कर रखा है।

तुझे मासूमों की चीख सुनाई नहीं देती,
अपने ही घर में हमलों की गूंज सुनाई नहीं देती।
खुद गड्डा खोदकर अपनों को कर रहा कुर्बान है,
अपने लिए बना रहा एक नया कब्रिस्तान है।

तेरा भूगोल बदलने को हम तैयार बैठे हैं,
तेरी औकात बताने को लाख़ों पहरेदार बैठे हैं।
अगर भूल गया तू पिछले जंग के परिणाम को तो,
फिर से इतिहास बनाने को हम तैयार बैठे हैं।

©नीतिश तिवारी।
जय भारत। जय हिन्द।

Wednesday, 14 September 2016

प्यार का करंट-बिजली के नाम बिरजू का लेटर।





















माई डियर
      बिजली।

आशा है कि तुम पहले की तरह सबकी जिंदगी में प्यार का करंट दौड़ा रही होगी। आज तुम्हारी शादी की पहली सालगिरह है और हमारे बिछड़ने का भी। समझ नहीं आ रहा है कि मैं तुम्हे ये खत्त क्यों लिख रहा हूँ। तुम्हें मुबारकबाद देने के लिए या अपने आप को सजा देने के लिए। हमें बिछड़े हुए एक साल हो गए लेकिन तुम्हारे प्यार में मिले हुए झटके से अभी तक उबर नहीं पाया हूँ।

याद है बिजली, कॉलेज का वो पहला दिन जब हम मिले थे। तुम गुलाबी सलवार कमीज़ में एकदम पटाखा लग रही थी और मैं एक माचिस के तिल्ली जैसा पतला था। तूने अपनी आँखों में ढेर सारा काजल लगाया था कि किसी की नज़र ना लगे। लेकिन मेरे अंदर बारूद जो भरा था, सो हो गया विस्फोट।

याद है बिजली, जब तुम रोज शाम को गाँव के पीछे वाली नहर पर मिलने आया करती थी। मैं तुझसे बार बार कहता था कि खुले बालों में आया कर और तुम मुझे चिढ़ाने के लिए चुटिया बनाकर आ जाती थी। रोज शाम को ढलते सूरज के साथ हमारा प्यार बढ़ता ही जा रहा था। फिर रात को मैं तेरी यादों को सिरहाने लेकर किसी तरह सो पाता था।

याद है बिजली, जब कॉलेज के बाद बार बार तुम शर्मा जी के गोलगप्पे खाने की ज़िद करती थी। लेकिन मेरा मन वर्मा जी की बरफी खाने का होता था। अफसोस हम कभी एक साथ गोलगप्पे और बरफी खा नहीं पाए क्योंकि दोनो दुकानें दूर दूर जो थीं। पर मैं अब भी शर्मा जी के दुकान से तुम्हारे हिस्से के गोलगप्पे खाता हूँ। मुझे पूरा उम्मीद है कि तू भी मेरे हिस्से का बरफी अपने नए घर में खाती होगी।

अब ना वो कॉलेज है, ना वो नहर के किनारे की यादें। पर एक बात का गुरुर जरूर है मुझे कि मेरी बिजली भले ही किसी और की हो चुकी है लेकिन तेरी यादों का करंट हमेशा मुझे उन दिनों की याद दिला देता है।
तुझे बेवफा का इल्ज़ाम तो नहीं दे सकता क्योंकि जितने दिन तूने वफ़ा निभाई बड़ी शिद्दत से निभाई।

तुझसे मिलने के इंतज़ार में,
तुम्हारा आशिक़,
बिरजू।

काव्य के बाद गद्य में मेरा ये छोटा सा प्रयास। रचना पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद।
© नीतिश तिवारी।

Sunday, 11 September 2016

बेवफाई करके चली गयी वो...




















रस्मों  रिवाजों की दुहाई देकर चली गयी वो,
अपने जिस्म की परछाई छोड़कर चली गयी वो,
बार-बार उसने कहा कि हालात के आगे मजबूर हूँ,
इश्क़ में फिर से बेवफाई करके चली गयी वो।

©नीतिश तिवारी।

Friday, 9 September 2016

फिर से मोहब्बत का हिसाब।




एक आँधी आयी और जलता हुआ वो चिराग बुझ गया।
लो फिर से आज मोहब्बत का हिसाब हो गया।।

तेरी यादों के जलते धुएँ से कैसे अपने आप को संभालूं।
आंसुओं का सहारा लूँ या समंदर को पास बुला लूँ।

©नीतिश तिवारी।


Monday, 29 August 2016

दिल के जज़्बात





खुले आसमान में मैं अपने ख्वाब बुनता रहा,
तेरी यादों के सहारे मैं उस रात जागता रहा,
कयामत आ जाती तो मैं स्वीकार कर लेता पर,
अफसोस, पतंग भी उड़ती रही और डोर भी कटता रहा।


फुर्सत के पल और उसकी धुंधली यादें,
बार बार नजर आती हैं उसकी कातिल निगाहें,
करता हूँ इंतज़ार अब भी फैलाएँ अपनी बाहें,
एक दिन वो आएगी और पूरी होंगी मेरी दुआएं।

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 14 August 2016

और आज़ादी मना रहे हैं हम।
















देश का हुआ बुरा हाल है,
गरीब अपनी दशा पर बेहाल है,
और आज़ादी मना रहे हैं हम।

ये कैसी आज़ादी और किसकी आज़ादी?
बहू बेटियों पर हो रहा अत्याचार है,
हैवानियत का जूनून सब पर सवार है,
इंसानियत हो रही शर्मशार है,
आँखें मूंदकर सो रही सरकार है।
और आज़ादी मना रहे हैं हम।

रोटी पानी बिजली अभी तक ना मिली,
दाने दाने को मोहताज परिवार है,
चारों तरफ फैला सिर्फ भ्र्ष्टाचार है,
पढ़े लिखे युवा भी बेरोजगार हैं।
और आज़ादी मना रहे हैं हम।

देशद्रोहियों का बढ़ रहा ब्यापार है,
आतंकियों के समर्थन में उतरे हजार हैं,
वीर सपूतों को कर रहे दरकिनार हैं,
ऐसी आज़ादी पर हमें धिक्कार है।

©नीतिश तिवारी।



Friday, 5 August 2016

मोहब्बत, सावन और वो।
























मेरे नाम का सिंदूर है उसकी माँग में,
उसने हाथों में मेंहदी रचाई है मेरे लिए,
जब जब धड़कता है मेरा दिल उसके लिए,
बजती है उसकी पायल सिर्फ मेरे लिए,


तो कैसे ना करूँ मोहब्बत उस दिलरुबा से,
क्यों ना पूजूँ मैं अपनी अर्धांगिनी को,
जब इस सावन में मोहब्बत बरस रही है खुलकर,
क्यों न भींग जाऊं आज मैं जी भरकर।

©नीतिश तिवारी

Monday, 1 August 2016

नए दौर का नया आशिक़।




परत दर परत निकल रहा हूँ मैं।
अपने ज़ख्मों से अब उबर रहा हूँ मैं।।

तूने जिन राहों में बिछाये थे कांटें मेरे लिए।
अब उन राहों से नहीं गुजर रहा हूँ मैं।।

फूलों की सेज सजी है, हर फ़िज़ा में बहार है।
इन मदमस्त हवाओं के साथ गुजर रहा हूँ मैं।।

वक़्त के खेल को हम बखूबी समझ गए थे।
पर इस वक़्त से आगे अब निकल रहा हूँ मैं।।

तेरी बेवफाई ने घायल किया पर हौंसला ना रुका।
फिर से नई मोहब्बत अब कर रहा हूँ मैं।।

धड़कन करती पुकार है साँसों में भी खुमार है।
नए दौर का नया आशिक़ अब बन रहा हूँ मैं।।

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 31 July 2016

जब से मिली हो तुम...




ना करार है, ना इनकार है,
जब से मिली हो तुम,
बस प्यार ही प्यार है।

अब भूले बिसरे गीत नहीं,
उलझी हुई कोई प्रीत नहीं,
जब से मिली हो तुम,
तुझसे रौशन मेरा जग संसार है।

कभी बगिया में खिली फूल सी,
कभी रेत में उड़ती धूल सी,
कभी आसमां में उड़ती पतंगों सी,
कभी दिल में उठते तरंगों सी।

गीत ना जाने कब ग़ज़ल बन गए,
मेरे सारे ग़म ना जाने कब धूल गए,
जब से मिली हो तुम,
तेरे प्यार में हम अब संवर गए।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 20 July 2016

नक़ाब पहने बैठे हैं।





कल उसकी आँखों में अपनी तस्वीर नजर आयी।
ज़ुल्म देखिए आज वो नक़ाब पहने बैठे हैं।।

फिर जिंदगी की एक नई शुरुआत होने को है,
सूखे बंजर में बरसात होने को है, 
तड़पता रहा उम्र भर जिस शख्स के खातिर,
उस शख्स से आज मुलाकात होने को है।

ख्वाहिशें अगर तुमसे हैं जिंदा तो चल साथ मेरे,
तेरे हर धड़कन की इबादत अब मैं करूँगा,
रंजिशें हैं जमाने में अगर हमारी मोहब्बत के खातिर,
तो मरते दम तक इस जमाने से मैं लड़ूंगा।

©नीतिश तिवारी।

Saturday, 25 June 2016

लो अच्छे दिन आ गए।










क़र्ज़ में डूबा किसान,
इंसान बना अब हैवान,
सो रहे हैं हुक्मरान,
लो अच्छे दिन आ गए।

जी भर के की मैंने पढ़ाई,
मास्टर डिग्री भी मैंने पाई,
पर नौकरी नहीं मिली भाई,
लो अच्छे दिन आ गए।

महंगाई का हुआ है ऐसा हाल,
थाली से गायब हुए सब्ज़ी दाल,
जनता किससे करे जवाब सवाल,
लो अच्छे दिन आ गए।

नेता को काम की फिक्र नहीं,
चुनावी वादों का कोई जिक्र नहीं,
हो रही है डिग्री की पड़ताल,
लो अच्छे दिन आ गए।

लोग तो हर साँस में बसे थे,
मैं भी उनकी खुशबू बन गया था,
एक आईना टूटा सब बिखर गया,
लो अच्छे दिन आ गए।

©नीतिश तिवारी।

Friday, 24 June 2016

Come, let's do love.



The shining stars are saying,
The singing birds are saying,
Come, let's do love.

No matter how far we are,
No matter how world see us,
Come, let's do love.

Imagination is something,
Where you reside.
Affection is something,
Where I survive.

This world is full of beauties,
But my world is only you.
In every single beates of my heart,
The one who exists is only you.

Every rays of sun is saying,
Every drops of rain is saying,
Come, let's do love.

©Nitish Tiwary.

Sunday, 19 June 2016

कुछ बातें हैं दिल में।









कुछ बातें हैं दिल में,
जिनको मैं बताना चाहता हूँ।
पर कोई नहीं मिलता सुनने वाला,
इसलिए लिख देना जानता हूँ।

कुछ वादें, कुछ कसमें, कुछ गीत, कुछ नज़्में,
याद करना चाहता हूँ, गुनगुनाना चाहता हूँ।
उन सूनी गलियों में भी ना जाने क्यों,
मैं एक रात बिताना चाहता हूँ।

बुझते दिये की लौ जलाना चाहता हूँ,
सूखे पत्तों को हरा बनाना चाहता हूँ।
इस अंजुमन में जो बिखरे से हालात हैं,
मैं उस हालात को सँवारना चाहता हूँ।

तेरे खाली जीवन में रंगों को भरना चाहता हूँ,
तेरे बासी किरण में भोर को देखना चाहता हूँ।
ये जो उलझी ज़ुल्फ़ों की काली घटाएँ हैं ना,
इन काली घटाओं से बारिश को देखना चाहता हूँ।

©नीतिश तिवारी।

Friday, 10 June 2016

तुम पर ऐतबार हुआ।













वक़्त ने क्या खूब हमें रुलाया है।
बड़ी देर से हम दोनों को मिलाया है।।

तुम पतझड़ में सावन के लिए बेकरार थी।
मैं रेगिस्तान में बारिश का तलबगार था।।

आग सीने में लगी थी जो तुम्हारे।
दिल मेरा क्यों ये जल रहा था।।

मोहब्बत की तड़प थी ये कैसी जो।
बिना लौ के ये मोम पिघल रहा था।।

पर बरसों की दूरी को अब हम मिटायेंगे।
दुनिया से छीनकर तुम्हे अपना बनाएंगे।।

तुम शिकवा करो हम शिकायत करेंगे।
तुम रूठा करो हम मनाया करेंगे।।

खुशनसीब हूँ मैं जो आज तेरा दीदार हुआ।
सज़दे जो बरसों मैंने किये उस पर ऐतबार हुआ।।

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 29 May 2016

मोहब्बत का रस्म।



















बात सिर्फ खूबसूरती की होती तो दिल बेकाबू ना होता,
हम तो लुट गए थे उसके सादगी के अंदाज़ से,
बिखरी जुल्फों में महकते खुशबुओं की जो बात थी,
हम तो होश खो बैठे थे करके दीदार उस महताब के।

गम की चादर ओढ़कर ज़ख्मों को सुलाया है मैंने,
अपने आंसुओं से जलते ख्वाबों को बुझाया है मैंने,
ये तकदीर की ख्वाहिश थी या जमाना बेवफा हो गया था,
इस मोहब्बत के रस्म को बिना तारीख के भी निभाया है मैंने।
©नीतिश तिवारी।






Thursday, 19 May 2016

Who is real jabra Fan? Gavrav or me-My letter to Mr. Shah Rukh Khan.



To,
My inspiration
Shri  Shah Rukh Khan Ji
Namaste


I believe you’re enjoying your success as always. Many congratulations for FAN but I’m quite disappointed as far as collection of the movie is concern. Your work in fan is remarkable sir.

I’m writing this letter just to express my love for you. You’ve inspired millions of people around the world. I’m one of them too. I love you not because your net worth is $600 M and you are biggest superstar in world, I love you because your life has given a reason to dream for a middle class youth like me. You’ve shown us the path of success with your hard work, commitment and dedication. The way you have achieved success in your life is truly phenomenal and inspirational.

Sir, I come from a lower middle class family where talking about your dream is just like building castles in air. But somehow I’ve managed to dream big in my life. And I can say it with full pride that credit goes to you sir.

When I was a child, I used to watch your movies and I loved your every movie. My friends hate this thing as they were fan of Salman Khan, Akshay Kumar and Ajay Devgan. Sometimes we had a long argue and fight over liking and disliking of movie stars. And the funny part was that I always being defeated by my friends in the battle of liking and disliking. And literally I used to enjoy my defeat because I love you.  If loving you will be the reason for my defeat in the game of liking and disliking, I would love to lose that game. When you are child you enjoy watching your heroes on the screen. Same was happening with me. I used to enjoy all your movies. But my love for you was not only restricted till my childhood.

The first time I watched your movie in movie theater was Don. After watching Don this simple fan became jabra fan. Don mein aapke performance ko dekhne ke baad aapke liye mera pyar diwangee mein badal chuka tha.
Then I started watching your interviews, your lovely stage performances even your advertisements on television. People hate to watch ads during ads breaks and change channels but I never touch my T.V. remote to change the channel hoping that you will come with your dimple smile promoting any product.

I truly believe that nobody can just admire you and your work in few words or sentences. You’re the whole book in which every page is special. And I love to read all these special pages every single day. I learn from your professional as well as your personal life. The way you do things in your life is enough to inspire anyone. I love you from bottom of my heart and I really mean it.

The real fact is that why I’m your jabra fan? Why you’ve inspired me the most? How you’ve produced spark in my life for achieving success ? The two incidents happened in my life which will answer all these questions.

The first one:
Once I was watching your interview. You were present at India Today Conclave looking dashing and dapper with your beard. While answering questions of journalist you said, "whatever is the situation just do your work. Whether you are sick or it is not your day, never stop doing your work. Hard work and commitment should never stop.”  Although it was just an answer for the question asked by  journalist  but your words directly entered to my soul from the speakers of my television set. Whenever I’m sad, whenever I feel tired and whenever I’m sick, I just recall your those words. And let me tell you one thing that your words really works like panacea. I feel energetic and optimistic just because your motivational answer given that day. Thank you so very much sir for inspiring me.

The second one:
When I created my blog, I wrote some of my personal stuffs on my blog. The very next day one of my friend said, "Hey Nitish! Why you’ve written your personal things on your blog? Who will read this? Why anyone will take interest in your personal life? Who the hell are you? Are you a famous personality? I had no answer of his questions. He was right. Who the hell I was? Just an ordinary student who trying to become extraordinary by creating blog? I was silent for ten seconds. Then all of sudden I recalled your dialogue from Chak De India and replied to my friend, "Ye sach hai ki main koi star nahi hoon jo meri personal life mein koi interest lega lekin wahi toh karna hai.”

If I talk about your movies, the top five movies which I loved most are DDLJ, Veer Zara, Chak De India, My Name is Khan and of course the recent one Fan. However it would be unfair to compare your one movie with another. All movies are superb and blessed with your amazing acting talent. Apke ek film ki doosre se tulna karna bilkula waise hi hai jaise ki aapke saamne gulab jamun, rusgulla, kaju barfi rasmalai rakha ho aur koi aapse kahe ki kaun si mithia khana pasand karenge? Are sabko ek saath khayenge bhai, ye bhi koi poochhne wali baat hai kya? After watching Chennai Express first time I realized that koi herone aapke acting par bhari pad rahi thi. I do have great respect for Deepika and you as you both have beautiful smile with dimple but it shouldn’t  be repeated in your future movies.

Sir, I am simple and innocent person. Jo dil mein hota hai bol deta hoon aur agar koi sunne wala nahi hota toh apne jajbaat ko pennon par utaar deta hoon. Having Master degree in computer application, I have a good carrier in corporate world but I would love to be a part of Bollywood.  My dream is to just like you. It doesn’t mean that I’m comparing myself with you. There can’t be next SRK. But I want to achieve success and fame as you did. If I’ll be able to achieve 5% of your life, the purpose of my life would be successful.

Last but not the least the special poem written by me just for you :

Sapnon ko poora karna seekha hai aapse,
Ummidon ko pankh lagana seekha hai aapse,
Zindgi mein naye raag gungunana seekha hai aapse,
Behtar ko sarvshresth banaana seekha hai aapse.

Koi kahta aapko baazigar hai,
Koi kahta aapko baadshah hai,
Par dil ki baat batata hoon aapko,
Aap to mere dil ke Shahanshah hain.

Khushiyan saare jahan ki mile aapko,
Har shikhar par aapka dhwaj lahraye,
Khuda se guzarish hai meri bas itni si,
Apni zindgi mein aap sada muskurayen.

Waiting for your blessings
Your Jabra Fan
Nitish Tiwary.

Sunday, 15 May 2016

जिंदगी फिर से...



एक बार फलक पर आ जाने तो दो,
इन चाँद सितारों का साथी बन जाने तो दो,
सलामी की ख्वाहिश नहीं बस याद रखना हमें,
एक बार आपकी दुआओं में शामिल हो जाने तो दो।

क्यों ना देखूँ मैं ख्वाब सब कुछ पाने का,
ये जीवन ही तो है सारे ग़मों को भूल जाने का,
कतरा कतरा आंसू बहे, लम्हा लम्हा ज़िन्दगी थमी,
फिर भी ढूंढ लिया है मैंने एक बहाना जीने का।

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 8 May 2016

बेहिसाब मोहब्बत।














दर्द का सितम अब मुझसे सहा नहीं जाता,
उस बेवफा को अब भी मैं भुला नहीं पाता।

वो वक़्त ज़ालिम था या वो खुदगर्ज़ थी,

उस दौर के ज़ख्म को मैं मिटा नहीं पाता।

हर साजिशें सिर्फ मेरे लिए ही बनी थी,

अपने कोई ख्वाब को मैं बचा नहीं पाता।

ज़ुल्म की इंतेहा सारी हदें पार कर गयी थी, 

अब भी मैं उस ज़ुल्म को भुला नहीं पाता।

दिल टूटने का गम नहीं उसकी रूसवाई से परेशान था,

उसकी शातिर अदाओं का फिर भी मैं गुलाम था।

क़र्ज़ चुका देता पर उसका मोहब्बत ही बेहिसाब था,

उसकी मोहब्बत के खातिर मैं हो गया बरबाद था।

©नीतिश तिवारी।


Saturday, 7 May 2016

सपनें।



जब वक़्त गुजरता जाता है,
सपने बड़े हो जाते हैं।
पूरा करने को इन्हें, 
हम जी जान लगाते हैं।

जितनी बड़ी सोंच, 
उतना बड़ा सपना।
पूरा करना है इसे,
यही लक्ष्य है अपना।

बाधाएँ तो आएंगी ही,
उनसे पार गुजरना है।
ना रुकना है ना थकना है,
बस मंज़िल तक पहुँचना है।

हर आँसू को खुशी में बदलना है,
हर गम को घूंट कर पी जाना है।
एक नयी ऊर्जा का संचार करना है,
अपने सपनों को अब पूरा करना है।

©नीतिश तिवारी।

Friday, 6 May 2016

मुझे इश्क़ की इज़ाज़त दे दे।




















ऐ मौला मुझे इश्क़ की इज़ाज़त दे दे,
बरसों से की है इबादत मैंने,
ना कभी की शिकायत मैंने,

शाम के ढलते सूरज के साथ,
चाहे थी कोई चाँदनी रात,
डूबा रहा हूँ मैं हर पल।
उसकी ख्वाबों में,
उसकी निगाहों में।

उसकी होठों की मुस्कान में,
उसकी आँखों की पहचान में,
उसकी नगमों की दास्तान में,
उसकी मोहब्बत की इम्तिहान में।

उसके हाथों की लकीरों में,
उसकी उलझी हुई तस्वीरों में,
उसकी शोख भरी अदाओं में,
उसकी बाहों की पनाहों में।

खोया रहा हूँ मैं,
बरसों तक,
ख्वाबों की ताबिर में,
एक रूठी हुई तकदीर में।

ऐ मौला मुझे इश्क़ की इज़ाज़त दे दे,
वरना इस इश्क़ का आकिबत कर दे।

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 3 May 2016

Let's create fire.














I have the power,
You have desire,
Let's create fire.

Something beyond the destination,

Something beyond the creation,
Something beyond the imagination,
Something beyond the perfection.

In those hangover nights,

We were unite.
Just to feel the passion,
Which comes from aggression,
To create new destination,
Which leads to obsession,
Because you're my addiction.

I have the power,

You have desire,
Let's create fire.

©Nitish Tiwary.



Thursday, 7 April 2016

ख्वाहिश की तरह।



















गुजरते वक़्त के साथ मैंने ये समझा है,
हालात कैसा भी हो अपने को जिंदा रखा है,
चाहे महफ़िल हो चाहे हो कोई वीरानी,
हर हालात में मैंने, बस मुस्कुराना सीखा है।

ऐ जिंदगी बहुत तड़पा रही है ना तू मुझे,
तुम्हारे इस तड़प की कसम सुन ले तू मुझे,
अभी जी रहा हूँ तुझे एक जरूरत की तरह,
पर एक दिन जियूँगा तुझे मैं ख्वाहिश की तरह।

©नीतिश तिवारी।


Monday, 4 April 2016

The Adorable You!




When you talk about me,
When you walk towards me,
I say...The Adorable YOU.

Somewhere deep in my heart,
You reside,
Only for my worth,
I say...The Adorable YOU.

In this imaginary world,
You are so real,
I have no fear,
Because you are here,
I say...The Adorable YOU.

Let the love begins,
Let the joy flow,
I say...The Adorable You.

©Nitish Tiwary.

Sunday, 3 April 2016

...अभी बाकी है।











इंतजार की हद अभी बाकी है,
इकरार की हद अभी बाकी है।
जिस प्यार की तलाश है मुझको,
उस प्यार की हद अभी बाकी है।

जिसको पाने की है ख्वाहिश मेरी,
उस ख्वाहिश की हद अभी बाकी है।
महबूब की गलियों से गुजरता हूँ रोज,
उनके दीदार की हद अभी बाकी है।

मेरी आँखों में है तस्वीर जिसकी,
उस तस्वीर का सँवरना अभी बाकी है।
जिसके लिए कई नज़्म लिख डाले,
उस नज़्म को गुनगुनाना अभी बाकी है।

खुशबू का महकना अभी बाकी है,
जुल्फों का उलझना अभी बाकी है।
जिस महबूब को पाने की तमन्ना है,
उस महबूब का मिलना अभी बाकी है।

©नीतिश तिवारी।

Saturday, 2 April 2016

फिर से वो धुरंधर आएगा।




















फिर से वो धुरंधर आएगा,
फिर से वो मंजर आएगा,
सूखी हुई बंजर में,
फिर से वो समंदर आएगा।


ना रुकना तुम्हे,

ना थमना तुम्हे,
बस चलते जाना है।
हार नहीं अल्प विश्राम है ये,
ज़िन्दगी का एक मुकाम है ये।

हार गए तो क्या हुआ,

जज्बा तो हमने दिखाया है,
हर मुश्किल में हर क्षण में,
सबके दिल को लुभाया है।

मन तो उदास बहुत है आज,

पर कल करेंगे फिर से प्रयास,
फिर से जमकर तैयारी होगी,
तब जीत सिर्फ हमारी होगी।

फिर से वो धुरंधर आएगा,

फिर से वो मंजर आएगा,
सूखी हुई बंजर में,
फिर से वो समंदर आएगा।

©नीतिश तिवारी।