Friday, 25 December 2015

जब से देखा है तेरा चेहरा।


रातें कटती अब नहीं,
दिन अब ढलता नहीं,
जब से देखा है तेरा चेहरा,
मेरा दिल अब मुझसे संभलता नहीं।

उलझनें अब हटती नहीं,
मंज़िलें अब रूकती नहीं,
जब से देखा है तेरा चेहरा,
धड़कनें अब बढ़ती नहीं।

पर्दा अब सरकता नहीं,
आशिक़ अब बहकता नहीं,
जब से देखा है तेरा चेहरा,
बारिश अब बरसता नहीं।

खुशबू अब महकती नहीं,
आरज़ू अब कोई जगती नहीं,
जब से देखा है तेरा चेहरा,
ज़िन्दगी अब ठहरती नहीं।

©नीतिश तिवारी।


8 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (26-12-2015) को "मीर जाफ़र की तलवार" (चर्चा अंक-2202) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. शुक्रिया देवेश।

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  3. बहुत सुन्दर ....गाना याद आ रहा है ...दिल क्या करे जब किसी को किसी से प्यार हो जाय ...

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    1. कविता जी मेरी रचना को सराहने के लिए आपका बहुत बहुत आभार।

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    2. कविता जी मेरी रचना को सराहने के लिए आपका बहुत बहुत आभार।

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  4. बेहतरीन रचना और उम्दा प्रस्तुति....

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