Wednesday, 24 June 2015

बदल दो हिन्दुस्तान.



मत हो अपने लक्ष्य से अनजान,
कर दो अब ये नया आह्वान,
बहुत हुयी बेकारी की दास्तान,
अब ये बदल दो हिन्दुस्तान. 

सुखदेव भगत सिंह राजगुरु का,
खाली ना जायेगा बलिदान,
चाणक्य  विवेकानंद की धरती को,
फिर से फिर से बनायेंगे हम महान. 

चाहे कितनी भी मुश्किल आ जाये,
हम छोड़कर ना भागेंगे मैदान,
कर दो सारी दुनिया में ये ऐलान,
अब ये बदल दो हिन्दुस्तान. 

हमें कसम है गंगा मईया की,
कभी झुकने ना  देंगे तिरंगे की शान,
दुनिया मत समझे हमें भोला और नादान,
नहीं तो कर देंगे सबको हैरान परेशान.

हम ऐसा सिस्टम लाएंगे,
जिसमे सबका होगा जन कल्याण,
सबके होठों पर होगी मुस्कान,
तभी तो भारत बनेगा महान. 

ना आगाज़ की फ़िक्र ना अंजाम का डर ,
हम पास करेंगे सारे  इम्तिहान,
दुनिया करेगी हमारा सम्मान,
अब ये बदल दो हिन्दुस्तान. 

©नीतीश तिवारी

Friday, 19 June 2015

तुम मेरे दिल की सुकून हो.



आ जाओ मेरे साथ,
अंधेरा रास्ता है तो क्या,
तुम्हारी चमक तो बरकरार है.

पता है?
मुझे जमाने से कभी,
शिकायत ना रही,
कि क्या मिला और क्या नही.

क्यूंकि  मैं जनता हूँ,
कि मेरा रास्ता भी तुम हो ,
और मेरी मंज़िल भी तुम हो.

और इसलिए नही कि
 तुम इतनी हसीन हो,
बल्कि इसलिए कि
 तुम मेरे दिल की सुकून हो.

©नीतीश तिवारी 

Wednesday, 17 June 2015

तुम्हारे जादू का असर है.










राहत क्यूँ नही देती हो मुझे ,
तुम अपने बार-बार के इस नखरे से,
अपने होठों की हँसी से,
अपने पलकों की नमी से,

तुम्हारे इस मुस्कुराने की अदा के,
दीवाने हैं करोड़ो,
और उनमे शामिल एक मैं भी हूँ,
तो क्यूँ ना शिकायत करूँ तेरी.

जब तुम चलती हो,
तो वक़्त कही थम सा जाता है,
भवरे गुनगुनाते नही,
चिड़ियाँ चहकती नही,
नादिया बहती नही,

सब तुम्हारे जादू का असर है,
ना जाने कहाँ से सीखा है,
सबको अपने वश मे करना,
और मुझे भी.

©नीतीश तिवारी

Tuesday, 16 June 2015

वो खूबसूरत एहसास.















वो खूबसूरत एहसास.
जब समंदर के किनारे,
लहरों से लहरें टकराती हैं,
तब तेरे होने से मुझे,
जीने की वजह नज़र आती है.

वो खूबसूरत एहसास.
जब बहकी इन फिजाओं में,
तेरी खुश्बू महकती है,
तब तेरे होने से मेरे,
साँसों मे एक आस सी जगती  है.

©नीतीश तिवारी

Sunday, 14 June 2015

Mountain Dew में से निकला कचरा.


 Mountain Dew का टैग लाइन है डर के आगे जीत है. मतलब इसको पीने से आप लाइफ में जीतेंगे ही जीतेंगे लेकिन कल अगर मैं इसे पी लेता तो जीतने की बात तो छोड़ दीजिए, शायद मैं हारने के भी काबिल नही रहता.

















जी हाँ कल जब मैं Mountain Dew जैसे ही पीने वाला था देखा की इसमे तो कुछ कचरा है. ये फोटो उसी बोतल की है जिसे मैं पीने वाला था.ध्यान से देखिए आपको कुछ नज़र आएगा. वो तो मेरी आदत है क़ि मैं ढक्कन खुलने के बाद देख कर पीता हूँ इसलिए मैं बच गया और फिर उसे फेकना पड़ा. जाहिर सी बात है मुझे नुकसान हुआ ना सिर्फ़ रुपये का बल्कि उस विश्वास का जो इतने दिनो से इस ब्रांड के प्रति बना हुआ था.

जब कभी टीवी पर आता था क़ि सॉफ्ट ड्रिंक्स में कीड़ा निकला या छिपकीली निकली या कई लोग मुझे मना करते थे पीने से तो विश्वास ही नही होता था क़ि ऐसा कैसे हो सकता है. मतलब multinational brand जिसका अरबों रुपये का टर्न ओवर हो उसे बनाने wale ऐसी ग़लती कैसे कर सकते हैं.

जीतने भी सॉफ्ट ड्रिंक्स हैं चाहे वो पेप्सीको का हो या कोक का उन सबमे mountain dew मेरा फ़ेवरेट था लेकिन अब मैं सॉफ्ट ड्रिंक्स नही पीऊंगा.
ये तो वही वाली बात हो गयी की कई साल से आप अपनी बेहद ही खूबसूरत गर्लफ़्रेंड से बेपनाह मोहब्बत कर रहे हो और अचानक आपको पता चलता है कि वो तो किसी और की अमानत है. मतलब ना कुआँ ना खाई डाइरेक्ट बेवफ़ाई. बिल्कुल ऐसी ही फीलिंग मुझे इस घटना के बाद हुआ.

फिर मैं  कहाँ चुप रहने वाला था. मैने तुरंत पेप्सिको के कस्टमर केयर 1800224020 पर कॉल किया. कॉल करने पर सुनाई देता है कि अपना voice मैसेज छोड़िए अपने नाम पता और फ़ोन नंबर के साथ अरे भाई कस्टमर केयर डाइरेक्ट हेल्प के लिए होता है कि Girl friend तरह बेवकूफ़ बनाने के लिए.ये तो वही वाली बात हो गयी की आप किसी लड़की को फ़ोन करें तो आपको सुनाई देता है, "hi I am julie I can't talk right now please leave the message after beep." खैर मैने मैसेज record करवा के छोड़ दिया लेकिन किसी से बात नही हुई. अब मैने Gurgaon  ऑफीस फ़ोन किया लेकिन वहाँ भी कुछ हल नही निकला.मैं किसी के पसंद को तो बदल नही सकता लेकिन इतना ज़रूर है की अपनी पसंद को तो बदल ही सकता हूँ. इसलिए अब से NO TO SOFT DRINKS.


मेरी आप सभी पढ़ने वालों से गुज़ारिश है की इस पोस्ट को शेयर करके हक़ीकत से सबको रूबरू कराईए. मेरे इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद.


©नीतीश तिवारी


Wednesday, 10 June 2015

कुछ डायरी के पन्नो से.



सारी कारीगरी खुदा ने तुम पर नेमत कर दी,
और तुम्हारी शिकायत कि हर कोई तुम्हे देखता है.

अपने होठों पर हँसी यू ही बनाए रखना,
अपने दिल मे कोई राज़ यू ही छुपाए रखना,
मैं रहूं या ना रहूं तेरे वज़ूद में,
पर किसी शख्स को अपने वज़ूद मे बनाए रखना.

कोई ख्वाब गर टूटे तो संभाल लेंगे हम,
तेरे दिल में छुपे राज़ को जान लेंगे हम,
बेवफ़ाई करनी हो तो बड़ी शिद्दत से करना वरना,
मौत आने पर भी खुदा से तुझे माँग लेंगे हम.

©नीतीश तिवारी

Saturday, 6 June 2015

It's only for you baby.





वो सपने मे आकर कहती है,"तुम इतना सपना क्यूँ देखते हो?" मैं सिर्फ़ इतना कह पता हूँ,"तुम जो हर रोज़ आती हो यहाँ." न जाने कौन सी कसक है तेरी यादों मे, जो मैं तुझे देखे बिना नही रह सकता. कोई खता हो जाए तो माफ़ कर देना मगर तुम्हारी खूबसूरती को बयान किए बिना नही रह सकता.

©नीतीश तिवारी


Thursday, 4 June 2015

एक हक़ीकत.












ये परिंदे जो उड़ने को बेताब हैं,
उनके ये पर तुम क्यूँ काटते हो.

ये बच्चे जो एक-एक दाने को मोहताज़ है,
उनके बीच ये जूठन क्यूँ बाँटते हो.

मेरे उड़ने की दास्तान बहुत लंबी नही लेकिन,
मेरे ही हिस्से का जायदाद तुम क्यूँ चाहते हो.

दुनिया जानती है मोहब्बत मे कुछ हासिल ना हुआ,
फिर खुदा से उसकी ही फरियाद क्यूँ करते हो.

©नीतीश तिवारी

Tuesday, 2 June 2015

अभी रुको.



अभी रुको,
तुम्हारी आँखें कुछ कह रही हैं,
मुझे पढ़ने दो,
इसमें छुपे हुए जज़्बात को। 

अभी रुको,
इन ज़ुल्फ़ों को मत हटाओ,
अपने चेहरे से,
ये याद दिलाती हैं मुझे।

जब हम बैठा करते थे,
खुले गगन के नीचे,
चंद मुलाक़ातें थी वो,
जो भूले नहीं भुलातीं। 

अभी रुको,
अपने होठों को मत हटाओ,
मेरे होठों से,
थोड़ा बढ़ जाने दो,
प्यार का ये पागलपन ,
उतर जाने दो ,
दरिया की गहराई में। 

©नीतीश तिवारी