Friday, 17 April 2015

shayri

ऐ खुदा  कैसा वो मंज़र होगा,
जब सारा समंदर बंज़र होगा,
लोग तरसेंगे एक एक बूँद को,
तब तू ही जहाँ का सिकंदर होगा.

©नीतीश तिवारी

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