Friday, 2 January 2015

'तुम भी अच्छे थे '।




भरोसा रूह का होता तो मोहब्बत मुकम्मल होता ,
पर उसने दीवानगी भी दिखायी तो सिर्फ जिस्म के खातिर। 

क़त्ल करने की अदा से बखूबी वाकिफ था वो,
जाते हुए मुस्कुरा कर कह दिया - 'तुम भी अच्छे थे '।  

नीतीश  तिवारी 

3 comments:

  1. .. क्या खूब लिखा है .. अंतिम पंक्तियों ने जादू कर दिया है ,,..

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  2. आपका शुक्रिया संजय जी ऐसे ही मेरा हौसला बढ़ाते रहिए.

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  3. भावपूर्ण रचना!

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