Sunday, 27 December 2015

जरा सा होश क्या आया...


मेरी हसरतों का हिसाब तुम क्या लगाओगे ऐ ज़ालिम,
खयाल आते ही उसे पन्नों पर उतार देता हूँ।

मेरी बदहाली में तो किसी ने साथ ना दिया,
जरा सा होश क्या आया मुझे, लोग देखने आ गए।

मुझे काफ़िर बना के ज़माने ने बेदखल कर दिया,
हमने तो थोड़ी सी इल्तज़ा की थी मोहब्बत के खातिर।

जरा सी बेरुखी क्या दिखाई वो हमसे दूर हो गए,
अरे कश्ती भी नहीं करता दुआ समंदर को छोड़ जाने का।

©नीतिश तिवारी।

Friday, 25 December 2015

जब से देखा है तेरा चेहरा।


रातें कटती अब नहीं,
दिन अब ढलता नहीं,
जब से देखा है तेरा चेहरा,
मेरा दिल अब मुझसे संभलता नहीं।

उलझनें अब हटती नहीं,
मंज़िलें अब रूकती नहीं,
जब से देखा है तेरा चेहरा,
धड़कनें अब बढ़ती नहीं।

पर्दा अब सरकता नहीं,
आशिक़ अब बहकता नहीं,
जब से देखा है तेरा चेहरा,
बारिश अब बरसता नहीं।

खुशबू अब महकती नहीं,
आरज़ू अब कोई जगती नहीं,
जब से देखा है तेरा चेहरा,
ज़िन्दगी अब ठहरती नहीं।

©नीतिश तिवारी।


Friday, 4 December 2015

जीवन की मेरी विश्वास बनी तुम।













जब जब तेरे मुखर बिंदु से,
मेरा नाम निकलता है,
तब तब मेरे ह्रदय में,
एक सैलाब उमड़ जाता है।

जब जब तेरे होठों की लाली,
चुपके से कुछ कहती है। 
तब तब एक नयी कहानी,
इस ज़माने में बनती है। 

क्यों न बनूँ  दीवाना प्रिये,
जब रूप तुम्हारा ऐसा है।  
जैसा हुआ है सबका हाल ,
मेरा हाल भी वैसा है।

अधरों की मेरी प्यास बनी तुम,
ग़ज़लों की मेरी अल्फ़ाज़ बनी तुम 
कैसे रह पाऊँ मैं तेरे बिना जब,
जीवन की मेरी विश्वास बनी तुम। 

©नीतीश तिवारी


Tuesday, 24 November 2015

मुहब्बत की अदायगी.


















ज़माने को आग लग जाए तेरे हुस्न की आँच से,
कोई भी आशिक़ महरूम ना रहे तेरी मुलाक़ात से,
मुहब्बत की अदायगी का तो पता नही मगर,
हर कोई माँगना ज़रूर चाहेगा तुझे इस कयनात से.


©नीतिश तिवारी

Saturday, 7 November 2015

असहिष्णुता के बहाने मोदी जी को बदनाम करने की साज़िश ।


 कितने अच्छे लग रहे हैं न ये बच्चे,हाथ में तिरंगा लिए हुए। आज मुझे इन बच्चों में अच्छाई  इसलिए नज़र आ रही है कि इन्हे नहीं पता  है कि धर्म,सम्प्रदाय और जाति क्या होता है। इन्हे तो बस इतना पता है की भारत हमारा देश है और ये भारत का तिरंगा झंडा है।


पिछले 2-3 महीने से देश में जो धर्म,सम्प्रदाय और जाति के नाम पर जो लोगों को बाँटने का काम किया जा रहा है,सरदार पटेल के इस अखण्ड भारत के सपने के लिए ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। आज देश के एक विशेष वर्ग को लगता है कि देश में असहिष्णुता का माहौल है और ये बढ़ रहा है। 

मैं कई दिनों से सोच रहा था कि देश के इस मौजूदा हालात पर कुछ लिखूँ ,लेकिन फिर दिमाग से इस बात को निकाल देता था कि मैं क्या लिखूंगा। सबको तो पता ही है कि क्या हो रहा है और क्या होना चाहिए और क्या नहीं होना चाहिए। लेकिन पिछले दिनों जिस  तरह से असहिष्णुता को लेकर दो लोगों के बयान आये उसने मेरे अंदर के साहित्यकार (सम्मान लौटाने वाला नहीं ) को लिखने पर मजबूर कर दिया। 

उन दो लोगों के नाम हैं -मुन्नवर राणा और शाहरुख़ खान। मैं व्यक्तिगत तौर पर इन दोनों का बहुत बड़ा प्रशंसक रहा हूँ और ताउम्र रहूँगा। मेरी सबसे बड़ी दिक्कत ये है की मैं जिस भी चीज़ को पसंद करता हूँ उसे पुरे दिल से करता हूँ या यूँ कहें की blindly करता हूँ। चाहे वो कोई व्यक्ति विशेष हो, कोई प्रोडक्ट हो या फिर कोई फिलॉसफी हो। 

पहले बात करते हैं मुन्नवर राणा साहब की। जिस तरह से उन्होंने ABP NEWS पर लाइव पूरे देश के सामने अपना सम्मान लौटाया, मुझे बहुत दुःख हुआ।  मतलब इतने बड़े साहित्यकार की आँखों में एक पता नहीं किस किस्म का डर दिख रहा था जैसे की दुनिया के सबसे बड़े सताए हुए मुसलमान वही हों। मैं किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं हूँ लेकिन माफ़ कीजियेगा जब से मोदी जी प्रधानमंत्री बने हैं तब से मुस्लिम समुदाय ने  बेवजह का डर अपने मन में पाल  रखा है जो की सरासर निराधार और दुर्भाग्यपूर्ण है। हाँ दादरी की घटना को मैं इंसानियत विरोधी मानता हूँ और इसकी कड़ी शब्दों में भर्त्सना करता हूँ।  जो हुआ बहुत हुआ ,ऐसा नहीं होना चाहिए था।  लेकिन हर बात के लिए देश के प्रधानमंत्री (जो दिन रात एक करके देश को समृद्ध और शक्तिशाली बनाने के लिए प्रयासरत हैं ) को जिम्मेदार ठहरना उचित नहीं है। राणा साहब मुझे हैरानी हुयी की आप जैसे बड़ा साहित्यकार भी क्यों नहीं समझ पाया की आज़ादी के बाद से ही मुस्लिम समुदाय का इस्तेमाल केवल वोट बैंक के तौर पर किया जाता रहा है। और आपको लगता है की देश में असहिष्णुता बढ़ रही है तो आपको अपनी बात रखनी चाहिए थी सरकार के सामने। आप इतने बड़े प्रसिद्ध शख्सियत हैं,मुझे नहीं लगता कि आपको प्रधानमंत्री से मिलने में  कोई दिक्कत का सामना करना पड़ता। क्या सम्मान लौटना ही आखिरी विकल्प रह गया था?

अब बात करते हैं किंग खान की। शाहरुख़ जी मैं आपको इसलिए पसंद नहीं करता की आप इतने बड़े सुपरस्टार हैं या $600 मिलियन आपका net worth  है। बल्कि इसलिए प्यार करता हूँ की आपने मिडिल क्लास यूथ को सपना देखना सिखाया है। जब मिडिया में खबर आई की आपको लगता है की देश में असहिष्णुता है ,ये सुनकर मैं हैरान रह गया।  पहली बार में मुझे लगा की ये मिडिया की फैलाई हुयी या तोड़ मड़ोड़ कर पेश किया गया बयान होगा लेकिन फिर मैंने आपका पूरा इंटरव्यू देखा।  मुझे लगता है की आपके बयान के पीछे दो कारण हो सकते हैं।  पहली बात तो ये है की आप चर्चा में बने रहना पसंद करते हैं और दूसरी बात ये है की आपको वाकई में ऐसा महसूस हुआ होगा की देश में  असहिष्णुता का माहौल है। 
हाँ मैं इस बात से सहमत हूँ कि कुछ संगठन और व्यक्ति विशेष आपके देशभक्त होने के ऊपर सवाल करते हैं जो की बिलकुल निराधार और निंदनीय है।  मुझे पता है की आप न केवल एक सच्चे देशभक्त है बल्कि एक बहुत अच्छे इंसान भी हैं। मेरी तरह हर भारतीय को आप पर गर्व है। पर माफ़ कीजियेगा "आपका यह कहना की देश में असहिष्णुता का माहौल है ", इस बात से मैं सहमत नहीं हूँ।

पुरस्कार लौटने वालों से मैं बस यही कहना चाहूंगा की क्या आपको पिछले डेढ़ सालों से ही असहिष्णुता महसूस हो रही है। और आप देश में खुली हवा में सांस नहीं ले पा रहे हैं।  अगर ऐसा है तो जाकर ऑक्सीजन का सिलेंडर लीजिये ,आपको उसकी ज्यादा जरुरत है,आप बेहतर महसूस करेंगे। उस समय कहाँ थे आप जब कश्मीरी पंडितों पर ज़ुल्म हुआ, जब भागलपुर में दंगे हुए, जब असम में खुलेआम कत्लेआम हो रहा था, जब मुज़्ज़फरनगर में फसाद हुआ और जब देश में आपातकाल लागू  हुआ था।  उस समय आपका आत्मसम्मान तेल लेने गया था ? या आप बंद-कबाब खाने में व्यस्त थे?

और सोनिया मैडम मार्च निकालने  से पहले इतना तो सोची होती कि अगर देश में असहिष्णुता का माहौल होता तो इतने सालो से आपके विदेशी होते हुए भी देश ने आपको स्वीकार न किया होता।  छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले में शहीद हुए कांग्रेसी नेताओं के लिए आप रात के बारह बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करती हैं और मुझे बताइये की कितने शहीद सैनिको के लिए कितनी बार आपने दुःख प्रकट किया। विपक्ष का मतलब हमेशा  विरोध नहीं होता है। देश के विकास में योगदान दीजिये मैडम और एक भारत श्रेष्ठ भारत के सपने को साकार करने में मदद कीजिये।




जय भारत। जय हिन्द। 
©नीतिश तिवारी


Saturday, 3 October 2015

बस ख्वाहिश यही है कि...



















मैं जीत जाऊं या मैं हार जाऊं,
बस ख्वाहिश यही है कि
मैं दरिया ये पार जाऊं।


मैं किसी के दिल में रहूँ या किसी की यादों में रहूँ,
बस ख्वाहिश यही है कि
मैं अपनों की निगाहों में रहूँ।


मैं उजालों में रहूँ या अंधेरों में भटकूँ,
बस ख्वाहिश यही है कि
मैं अपने मंजिल तक पहुँच सकूं।


मेरा नाम हो या मैं गुमनाम हो जाऊं,
बस ख्वाहिश यही है कि
मैं एक इन्सान बन जाऊं।
©नीतिश तिवारी

Friday, 2 October 2015

ऐसा मुझे दिलदार ना मिला।


















मुझे मेरे महबूब से कभी इकरार ना मिला,
दोस्ती तो बहुत मिली पर प्यार ना मिला। 
हम खरीद लेते पूरा जहान उसके खातिर,
पर इस धरती पर ऐसा कोई ज़मींदार ना मिला।

और बदलते वक़्त की आबो-हवा तो देखिये,
 इन गहरी साँसों का कोई खरीदार ना मिला,
हम इलज़ाम लगायें भी तो किस किस पर,
कोई भी ऐसा शख्स मुझे कुसूरवार ना मिला। 

बड़ा खतरा है इस ज़न्नत के रास्ते में ,
इस रास्ते पर मुझे कोई पहरेदार ना मिला,
और हम लूटा देते अपनी सारी कायनात उस पे,
पर अफ़सोस कोई ऐसा मुझे दिलदार ना मिला।

©नीतीश तिवारी

Sunday, 16 August 2015

I Love You Baby.


Everyone is here wanna see you and I am also busy in watching you. Just because I feel that you are paragon of beauty,and you are,not because I feel but because GOD has gifted you with such a beauty that someone can't live without watching you.And I'm so glad that you are with me.

The way you look at me with your enchanting eyes.

The way you kiss me with your juicy lips.
A burning desire then generates within me to live with you forever.

You are my morning,you are my night.

And I'm so happy that you are my life.
Every morning I desire for you.
Every night creates fire for you.

I Love You My Sweet Heart.


©NITISH TIWARY


Saturday, 25 July 2015

इतना याद क्यूँ करती हो मुझे.




ऐसा क्यूँ करती हो ,
तुम बार-बार,
कि मेरी आँखों से पहुँच कर,
मेरे दिल मे उतर जाती हो.
और मैं फिर,
एक द्वंद मे फँस जाता हूँ.
कि मेरी आँखे खूबसूरत हैं 
या मेरा दिल.

इतना याद क्यूँ करती हो मुझे,
की हिचकियाँ रुकने 
का नाम नही लेतीं.
और हर बार मैं तुम्हारे पास
आने को बेताब हो जाता हूँ.

©नीतीश तिवारी

Wednesday, 15 July 2015

एक मंज़िल की तलाश थी.







फ़ुर्सत अगर होता तो हक़ीकत बयान करते,
बातों से नही अपनी नगमों से दास्तान कहते,
ज़िंदगी की इस भीड़ ने दो राहे पर खड़ा कर दिया वरना,
मंज़िल की क्या बात थी हमे रास्ते भी सलाम करते.

मुझे चमचमाती रौशनी का शौक नही रहा कभी,
बस एक अदद दीये की दरकार थी,
और मुसाफिर कहते हैं लोग हमे इस भीड़ का,
पर मुझे तो सिर्फ़ एक मंज़िल की तलाश थी.

©नीतीश तिवारी

Tuesday, 14 July 2015

पहचान अभी बाकी है.

















 

बैठा रहा मैं एक किरदार सा बनके,
उलझी हुई तस्वीर का आकार सा बनके,
हमारी इबादत कभी मुकम्मल ना हुई,
बीच भवंर मे फंस गये मझधार सा बनके.

मुस्कुराते लबों की पहचान अभी बाकी है,
मचलते हौसलों की उड़ान अभी बाकी है,
समंदर से कह दो किनारों से आगे  ना बढ़े,
अभी तो नीव पड़ी है, पूरा मकान अभी बाकी है.

©नीतीश तिवारी

Wednesday, 24 June 2015

बदल दो हिन्दुस्तान.



मत हो अपने लक्ष्य से अनजान,
कर दो अब ये नया आह्वान,
बहुत हुयी बेकारी की दास्तान,
अब ये बदल दो हिन्दुस्तान. 

सुखदेव भगत सिंह राजगुरु का,
खाली ना जायेगा बलिदान,
चाणक्य  विवेकानंद की धरती को,
फिर से फिर से बनायेंगे हम महान. 

चाहे कितनी भी मुश्किल आ जाये,
हम छोड़कर ना भागेंगे मैदान,
कर दो सारी दुनिया में ये ऐलान,
अब ये बदल दो हिन्दुस्तान. 

हमें कसम है गंगा मईया की,
कभी झुकने ना  देंगे तिरंगे की शान,
दुनिया मत समझे हमें भोला और नादान,
नहीं तो कर देंगे सबको हैरान परेशान.

हम ऐसा सिस्टम लाएंगे,
जिसमे सबका होगा जन कल्याण,
सबके होठों पर होगी मुस्कान,
तभी तो भारत बनेगा महान. 

ना आगाज़ की फ़िक्र ना अंजाम का डर ,
हम पास करेंगे सारे  इम्तिहान,
दुनिया करेगी हमारा सम्मान,
अब ये बदल दो हिन्दुस्तान. 

©नीतीश तिवारी

Friday, 19 June 2015

तुम मेरे दिल की सुकून हो.



आ जाओ मेरे साथ,
अंधेरा रास्ता है तो क्या,
तुम्हारी चमक तो बरकरार है.

पता है?
मुझे जमाने से कभी,
शिकायत ना रही,
कि क्या मिला और क्या नही.

क्यूंकि  मैं जनता हूँ,
कि मेरा रास्ता भी तुम हो ,
और मेरी मंज़िल भी तुम हो.

और इसलिए नही कि
 तुम इतनी हसीन हो,
बल्कि इसलिए कि
 तुम मेरे दिल की सुकून हो.

©नीतीश तिवारी 

Wednesday, 17 June 2015

तुम्हारे जादू का असर है.










राहत क्यूँ नही देती हो मुझे ,
तुम अपने बार-बार के इस नखरे से,
अपने होठों की हँसी से,
अपने पलकों की नमी से,

तुम्हारे इस मुस्कुराने की अदा के,
दीवाने हैं करोड़ो,
और उनमे शामिल एक मैं भी हूँ,
तो क्यूँ ना शिकायत करूँ तेरी.

जब तुम चलती हो,
तो वक़्त कही थम सा जाता है,
भवरे गुनगुनाते नही,
चिड़ियाँ चहकती नही,
नादिया बहती नही,

सब तुम्हारे जादू का असर है,
ना जाने कहाँ से सीखा है,
सबको अपने वश मे करना,
और मुझे भी.

©नीतीश तिवारी

Tuesday, 16 June 2015

वो खूबसूरत एहसास.















वो खूबसूरत एहसास.
जब समंदर के किनारे,
लहरों से लहरें टकराती हैं,
तब तेरे होने से मुझे,
जीने की वजह नज़र आती है.

वो खूबसूरत एहसास.
जब बहकी इन फिजाओं में,
तेरी खुश्बू महकती है,
तब तेरे होने से मेरे,
साँसों मे एक आस सी जगती  है.

©नीतीश तिवारी

Sunday, 14 June 2015

Mountain Dew में से निकला कचरा.


 Mountain Dew का टैग लाइन है डर के आगे जीत है. मतलब इसको पीने से आप लाइफ में जीतेंगे ही जीतेंगे लेकिन कल अगर मैं इसे पी लेता तो जीतने की बात तो छोड़ दीजिए, शायद मैं हारने के भी काबिल नही रहता.

















जी हाँ कल जब मैं Mountain Dew जैसे ही पीने वाला था देखा की इसमे तो कुछ कचरा है. ये फोटो उसी बोतल की है जिसे मैं पीने वाला था.ध्यान से देखिए आपको कुछ नज़र आएगा. वो तो मेरी आदत है क़ि मैं ढक्कन खुलने के बाद देख कर पीता हूँ इसलिए मैं बच गया और फिर उसे फेकना पड़ा. जाहिर सी बात है मुझे नुकसान हुआ ना सिर्फ़ रुपये का बल्कि उस विश्वास का जो इतने दिनो से इस ब्रांड के प्रति बना हुआ था.

जब कभी टीवी पर आता था क़ि सॉफ्ट ड्रिंक्स में कीड़ा निकला या छिपकीली निकली या कई लोग मुझे मना करते थे पीने से तो विश्वास ही नही होता था क़ि ऐसा कैसे हो सकता है. मतलब multinational brand जिसका अरबों रुपये का टर्न ओवर हो उसे बनाने wale ऐसी ग़लती कैसे कर सकते हैं.

जीतने भी सॉफ्ट ड्रिंक्स हैं चाहे वो पेप्सीको का हो या कोक का उन सबमे mountain dew मेरा फ़ेवरेट था लेकिन अब मैं सॉफ्ट ड्रिंक्स नही पीऊंगा.
ये तो वही वाली बात हो गयी की कई साल से आप अपनी बेहद ही खूबसूरत गर्लफ़्रेंड से बेपनाह मोहब्बत कर रहे हो और अचानक आपको पता चलता है कि वो तो किसी और की अमानत है. मतलब ना कुआँ ना खाई डाइरेक्ट बेवफ़ाई. बिल्कुल ऐसी ही फीलिंग मुझे इस घटना के बाद हुआ.

फिर मैं  कहाँ चुप रहने वाला था. मैने तुरंत पेप्सिको के कस्टमर केयर 1800224020 पर कॉल किया. कॉल करने पर सुनाई देता है कि अपना voice मैसेज छोड़िए अपने नाम पता और फ़ोन नंबर के साथ अरे भाई कस्टमर केयर डाइरेक्ट हेल्प के लिए होता है कि Girl friend तरह बेवकूफ़ बनाने के लिए.ये तो वही वाली बात हो गयी की आप किसी लड़की को फ़ोन करें तो आपको सुनाई देता है, "hi I am julie I can't talk right now please leave the message after beep." खैर मैने मैसेज record करवा के छोड़ दिया लेकिन किसी से बात नही हुई. अब मैने Gurgaon  ऑफीस फ़ोन किया लेकिन वहाँ भी कुछ हल नही निकला.मैं किसी के पसंद को तो बदल नही सकता लेकिन इतना ज़रूर है की अपनी पसंद को तो बदल ही सकता हूँ. इसलिए अब से NO TO SOFT DRINKS.


मेरी आप सभी पढ़ने वालों से गुज़ारिश है की इस पोस्ट को शेयर करके हक़ीकत से सबको रूबरू कराईए. मेरे इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद.


©नीतीश तिवारी


Wednesday, 10 June 2015

कुछ डायरी के पन्नो से.



सारी कारीगरी खुदा ने तुम पर नेमत कर दी,
और तुम्हारी शिकायत कि हर कोई तुम्हे देखता है.

अपने होठों पर हँसी यू ही बनाए रखना,
अपने दिल मे कोई राज़ यू ही छुपाए रखना,
मैं रहूं या ना रहूं तेरे वज़ूद में,
पर किसी शख्स को अपने वज़ूद मे बनाए रखना.

कोई ख्वाब गर टूटे तो संभाल लेंगे हम,
तेरे दिल में छुपे राज़ को जान लेंगे हम,
बेवफ़ाई करनी हो तो बड़ी शिद्दत से करना वरना,
मौत आने पर भी खुदा से तुझे माँग लेंगे हम.

©नीतीश तिवारी

Saturday, 6 June 2015

It's only for you baby.





वो सपने मे आकर कहती है,"तुम इतना सपना क्यूँ देखते हो?" मैं सिर्फ़ इतना कह पता हूँ,"तुम जो हर रोज़ आती हो यहाँ." न जाने कौन सी कसक है तेरी यादों मे, जो मैं तुझे देखे बिना नही रह सकता. कोई खता हो जाए तो माफ़ कर देना मगर तुम्हारी खूबसूरती को बयान किए बिना नही रह सकता.

©नीतीश तिवारी


Thursday, 4 June 2015

एक हक़ीकत.












ये परिंदे जो उड़ने को बेताब हैं,
उनके ये पर तुम क्यूँ काटते हो.

ये बच्चे जो एक-एक दाने को मोहताज़ है,
उनके बीच ये जूठन क्यूँ बाँटते हो.

मेरे उड़ने की दास्तान बहुत लंबी नही लेकिन,
मेरे ही हिस्से का जायदाद तुम क्यूँ चाहते हो.

दुनिया जानती है मोहब्बत मे कुछ हासिल ना हुआ,
फिर खुदा से उसकी ही फरियाद क्यूँ करते हो.

©नीतीश तिवारी

Tuesday, 2 June 2015

अभी रुको.



अभी रुको,
तुम्हारी आँखें कुछ कह रही हैं,
मुझे पढ़ने दो,
इसमें छुपे हुए जज़्बात को। 

अभी रुको,
इन ज़ुल्फ़ों को मत हटाओ,
अपने चेहरे से,
ये याद दिलाती हैं मुझे।

जब हम बैठा करते थे,
खुले गगन के नीचे,
चंद मुलाक़ातें थी वो,
जो भूले नहीं भुलातीं। 

अभी रुको,
अपने होठों को मत हटाओ,
मेरे होठों से,
थोड़ा बढ़ जाने दो,
प्यार का ये पागलपन ,
उतर जाने दो ,
दरिया की गहराई में। 

©नीतीश तिवारी


Sunday, 31 May 2015

कशमकश ज़िंदगी की.



अंज़ाम की फ़िक्र,
आगाज़ का डर.
कशमकश ज़िंदगी की,
न इधर जाए न उधर.
©नीतीश तिवारी

Thursday, 28 May 2015

Truth Lies In You.











It may be true,
That I won't get you.
But it's also true,
That I love you.

With the anger voice,
For the other's choice.
You left me
Between water and ice.

It may be true
That you will be happy,
But it's also true
That I won't be happy.

In the darkest night
You were my only sight.
In the heavy rain,
I want to see you again.

©Nitish Tiwary. 

Tuesday, 26 May 2015

तेरे प्यार मे आबाद मैं.















सवाँरु तेरी पलकों से कोई  ख्वाब मैं,
अंधेरों में खो जाऊं बनके कोई जवाब मैं,
गुज़ारा नही होता तेरी यादों के बिना,
किस-किस तरह दूँ प्यार का हिसाब मैं.

रुकती है नज़रें मेरी सिर्फ़ तेरे ही चेहरे पर,
कैसे ना देखूं ये खिलता हुआ गुलाब मैं,
भले ही किसी को मुहब्बत हासिल ना हुई हो,
पर रहना चाहता हूँ तेरे प्यार मे आबाद मैं.

©नीतीश तिवारी 

Monday, 11 May 2015

मस्ती भरी शायरी.


यहाँ हर दिया बुझने पर मजबूर है,
और तुम रौशनी की दरकार करते हो,
खुदा के कैसे बंदे हो तुम जो,
हर सहरी पर इफ्तार करते हो.

वो वक़्त भी गुलाम था
 वो हुस्न भी कमाल था,
हर गली मे मचा बवाल था,
क्यूंकी मेरे शहर मे उसका ननिहाल था.

©नीतीश तिवारी


Sunday, 10 May 2015

Happy Mother's Day.


जब कभी दिल घबराए,
जब कभी रोना आए,
जब कभी नींद ना आए,
तो माँ ही लोरी सुनाए.
जगत का पालनहार है तू,
सबके दिलों का प्यार है तू,
सारी खुशियाँ तुझसे है आती,
सबको जीना तू सिखाती.

                               ©नीतीश तिवारी


Saturday, 25 April 2015

दिल लुटाएं कैसे.










कि कोई आए तो आए कैसे,
मुझको भाए तो भाए कैसे.

अपना बनाए तो बनाए कैसे,
हम दिल लुटाएं तो लुटाएं कैसे.

कोई खुश्बू महकाय तो महकाय कैसे,
कोई आरज़ू जगाए तो जगाए कैसे.

अपनी बेबसी बताएँ तो बताएँ कैसे,
अपनी खुशी छुपाएँ तो छुपाए कैसे.

©नीतीश तिवारी

Monday, 20 April 2015

होठों की मुस्कान लेकर लौटा हूँ.














ढूँढ रहा था जिस पल को उसमे होकर लौटा हूँ,
मैं मुसाफिर हूँ यारो सब कुछ खोकर लौटा हूँ,
और तुम क्या जानोगे अदब मेरी दीवानगी का,
उसके होठों की मुस्कान को मैं लेकर लौटा हूँ.

कोई वो पल ना था जिस पल मैं तड़पा  नही,

सारे गमों को अपने मैं सॅंजो कर लौटा हूँ,
दुनिया मुझसे नफ़रत करे फिर भी मुझे गम नही,
सबके दिल मे एक प्यार के बीज़ बो कर लौटा हूँ.

©नीतीश तिवारी 

Friday, 17 April 2015

shayri

ऐ खुदा  कैसा वो मंज़र होगा,
जब सारा समंदर बंज़र होगा,
लोग तरसेंगे एक एक बूँद को,
तब तू ही जहाँ का सिकंदर होगा.

©नीतीश तिवारी

Saturday, 21 March 2015

जुल्फों के नज़ारे बहुत हैं.















आसमाँ में तारे बहुत हैं,
मेरे लिए सहारे बहुत हैं.
तुझे क्या खबर ओ ज़ालिम,
तेरी जुल्फों के नज़ारे बहुत हैं. 


©नीतीश तिवारी 

Sunday, 15 March 2015

बैठा है एक पहरेदार.















अब और नहीं कर सकता मैं इंतज़ार ,
क्यूंकि मुझे हो गया है तुझसे प्यार,
तुम भी आ जाओ कर लो इकरार ,
नहीं तो फिर से आ जायेगा वो इतवार। 

दुनिया मुझे कहती है मोहब्बत में बीमार,
क्यूंकि साथ मिला है तेरा मुझे बेशुमार ,
तेरे दरवाज़े पे बैठा है एक पहरेदार,
हम कैसे जा पाएंगे छोड़कर घर-बार। 

© नीतीश तिवारी 

Tuesday, 10 March 2015

हालात


पत्ते बिखर गये हैं,
आओ इनको समेट लें,
हुनर निखर गये हैं,
आओ इनको सहेज लें.

रिश्ते बिगड़ गये हैं,
आओं इनको बना लें.
अपने बिछड़ गये हैं,
आओ इनको मना लें.

©नीतीश तिवारी 

Thursday, 5 March 2015

होली की हार्दिक शुभकामना.


                        खुशियों की बहार है,
                        रंगों की बौछार है,
                        फिर से आया ,
                        होली का त्योहार है.

                        नये नये पकवान हैं,
                        आए घर मेहमान हैं,
                        मिलकर खुशियाँ बाँट रहे,
                        पूरा सब इंतज़ाम है.

             मेरी तरफ़ से आप सभी को रंगोत्सव होली की                                 
                                          हार्दिक शुभकामना.

                         ©नीतीश तिवारी 




Saturday, 28 February 2015

मैं ग़ज़ल लिखता हूँ.

















फ़ुर्सत में मैं ग़ज़ल लिखता हूँ,
तेरी यादों का एक सफ़र लिखता हूँ.

वो वक़्त जो थम सा गया था कभी,
उस वक़्त की रगुजर लिखता हूँ.

काली घटा और तेरी ज़ुल्फ़ो के बीच,
गुजरा हुआ वो मौसम लिखता हूँ.

हर एक रंग में और तेरे संग में,
सपनो का एक शहर लिखता हूँ.

कुछ बदहाली में तो कुछ खुशहाली में,
ज़िंदगी का ये भ्रम लिखता हूँ.

तेरी खुश्बू में और तेरी जूस्तजू में,
अपने होने का वो वहम लिखता हूँ.

तेरी धड़कन में और तेरी तड़पन में,
अपने साँसों का वो सितम लिखता हूँ.

तेरी आवारगी में और तेरी दीवानगी में,
भटकते राहों का मंज़िल लिखता हूँ.

फ़ुर्सत में मैं ग़ज़ल लिखता हूँ,
तेरी यादों का एक सफ़र लिखता हूँ.


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धन्यवाद.



©नीतीश तिवारी



Friday, 20 February 2015

तू कब होगी हासिल.



पल भर में शबनम,पल भर मे शोला,
शातिर तू है और मैं कितना भोला.

पतझड़ मे सावन और सावन मे बारिश,
तू है जैसे मेरे बरसों की ख्वाहिश.

अरबों की दौलत और दौलत की दुनिया,
आती है महफ़िल मे तुझसे ही खुशियाँ.

नयनों मे काजल और माथे पर बिंदिया,
उड़ा ले जाती है मेरी रातों की निंदिया.

तुझसे ही है रास्ता तुझसे ही है मंज़िल,
मेरे दिल की है ख्वाहिश तू कब होगी हासिल.

©नीतीश तिवारी