Wednesday, 25 June 2014

वो रंग जमा गए।



बड़ी फुर्सत से वो रंग जमा गए ,
बरसों बाद मुझे वो अंग लगा गए। 

धड़कन का सुरूर जब दिल में चढ़ जाता है ,
तेरे आने कि खुशबू से मेरा मन सँवर जाता है,
किस लम्हे तक का इंतज़ार करूँ मैं अब ,
हर लम्हा मुझे पल पल तड़पाता  है। 

नीतीश तिवारी 




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