Tuesday, 3 December 2013

कश्मकश ज़िंदगी की।













कोई रूठे कैसे ,
कोई मनाए कैसे ,
कोई बिछड़े कैसे ,
कोई भुलाए कैसे। 

एक प्यारी सी हँसी ,
एक नाज़ुक सी अदा ,
एक भोला सा चेहरा ,
एक चाँद सा मुखड़ा। 

कोई छुपाए कैसे ,
कोई दिखाए कैसे ,
तेरे गीत ग़ज़ल के ,
कोई गुनगुनाए कैसे। 

एक माटी कि मूरत ,
एक भोली सी सूरत ,
एक नन्ही सी गुड़िया ,
एक सोने कि चिड़िया। 

कोई आजमाए कैसे ,
कोई सताए कैसे ,
अपने दिल कि बात ,
कोई  बताए कैसे। 

3 comments:

  1. Some how our current blog post match...nd m glad to read this post... awesome one!!
    And I guess u r also searching the answers..like me..

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  2. well thank you so much for appriceation about my post..and yes i am searching the answers..

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  3. kya khubsurat poem hai bhiya i m proud of u.

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