Tuesday, 19 November 2013

एक चाँद नज़र आता है।


















जब चाँद छुप जाता है बादल  में ,
तब तेरे चहरे की चमक देती  है रौशनी। 
जब रात गुजरती है तेरी बाँहों में ,
तब तेरे बदन कि खुशबू देती है ज़िंदगी। 

जब शोर होता है सन्नाटों में ,
तब तेरी हर एक धड़कन देती है राहत। 
जब कोई नहीं होता है कमरे में ,
तब तेरी हर एक साँस कि होती है आहट। 

जब इतने सारे रंग यहाँ ,
तब चैन कहाँ मिल पाता है। 
तेरी भुली बिसरी बातों से अब ,
वक़्त कहाँ गुजर पाता है। 

जब जज्बातों का सैलाब उमड़ कर आता है ,
तब तेरा हर वो ख्वाब नज़र आता है। 
जब सजती है तन्हाई कि वो महफ़िल ,
तब फिर से मुझे एक चाँद नज़र आता है। 

1 comment:

  1. जब सजती है तन्हाई कि वो महफ़िल ,
    तब फिर से मुझे एक चाँद नज़र आता है।

    ...लाज़वाब....दिल को छूते बहुत कोमल अहसास...

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