Monday, 21 October 2013

ना जाने क्या लिखूँ।



















कुछ अल्फ़ाज़ लिखूँ, 
कुछ ज़ज़्बात लिखूँ,
ना जाने क्या ख्वाब लिखूँ। 

अपने आँसू लिखूँ,

अपनी खुशी लिखूँ, 
ना जाने क्या हालात लिखूँ। 

तेरी वफ़ा लिखूँ ,

तेरी जफ़ा लिखूँ ,
ना जाने क्या सौगात लिखूँ। 

कभी पतझड़ लिखूँ ,

कभी सावन लिखूँ ,
ना जाने क्या मौसम लिखूँ। 

कभी तुझे लिखूँ ,

कभी उसे लिखूँ ,
न जाने मैं किस  किसको लिखूँ। 

स्नेह के साथ 
आपका  नीतीश 

7 comments:

  1. hi nice poem
    thanks for ur comment on my blog
    I am following ur blog via gfc
    hope u follow back
    http://vanduchoudhary.blogspot.in/

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    1. thank you so very much for your appriciation...

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  2. मंगलवार 12/11/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    आप भी एक नज़र देखें
    धन्यवाद .... आभार ....

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  3. कभी खुद को कभी हालत लिखूं
    रात के माथे पे क्या बात लिखूं
    जख्म ज़माने ने हजारों दिए हैं
    किस किस कहूँ क्या बात लिखूं
    मधु "मुस्कान "

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  4. aap sabhi ka bahut bahut dhanywad..

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