Sunday, 7 July 2013

एक एहसास


कल्पना से परे है तेरा प्यार,
जिसमे तेरा ही नशा है मेरे यार,
खूबसूरत वादियों में घूमते हुए पंछी की तरह,
चलो बसाते हैं अपना घर संसार.

जिसमे तुम्हारा साथ हो,

तुम्हारा एहसास हो,
प्यार की गीत हो, 
नये-नये प्रीत हो,

एक कोरी किताब हो,

जिसमे लिखेंगे अपनी दास्तान,
ज़माने के लिए नही,
अपनी यादों को ज़िंदा रखने के लिए,
अपनी ख्वाबों को हक़ीकत बनाने के लिए,
और ज़िंदगी को जन्नत मे गुज़ारने के लिए.

नीतीश

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