Friday, 26 July 2013

...कुछ तो लोग कहेंगे

                      
                      अरे कभी तो ज़िक्र हो उस ज़ालिम बेवफा का ,
                      लोग मुझसे मेरी मोहब्बत की दास्तान पूछते हैं.


                      कुछ धड़कन का कसूर था, कुछ उनकी अदाओं का,
                      और लोग कहते हैं की मैं मोहब्बत में बीमार हो गया.

Tuesday, 23 July 2013

Development of india has been stopped so has my life...


जी हाँ, सही पढ़ा आपने. भारत का विकास रुक गया है इसलिए मेरी भी ज़िंदगी थम सी गयी है.अगले साल मेरठ मे रहते हुए मुझे दस साल हो जाएँगे और कॉंग्रेस की केंद्र सरकार को भी सत्ता में आए हुए.(अब भी आपकी शक है क्या कि मुलायम सिंह यादव और मायावती समर्थन वापस ले लेंगे और सरकार गिर जाएगी,अरे ये तो ऐसे नेता हैं जिनका कॉंग्रेस के साथ आकर्षण बल का प्रभाव चुंबक से भी ज़्यादा है.)

मुझे आज भी याद  है की मई 2004 मे सरकार का गठन हुआ था और जून में मैं मेरठ आया था.मुझे भी उम्मीद थी अपनी ज़िंदगी से की नये जगह पर भी ज़िंदगी अच्छी तरह से चलती रहेगी,ठीक उसी प्रकार जैसे नये सरकार से लोगों को उम्मीद थी.लेकिन हम अगर इक्के दुक्के बदलाव को छोड़ दें तो ना ही देश मे और ना ही मेरी ज़िंदगी मे बड़ा बदलाव आया है.ऐसा लग रहा है मानो सबकुछ भगवान भरोसे चल रहा है.

लेकिन एक फ़र्क है, मैं तो कम से कम सार्वजनिक मंच पर अपने विचार वयक़्त करता तो हूँ, पर अफ़सोस हमारे मनमोहन जी ने पिछले 9 सालो मे कितनी बार अपने विचार वयक़्त किए हैं वो हम सब जानते हैं.
अब बताइए सरकार ने इतनी महंगाई बड़ा दी है कि अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के बारे मे भी दस बार सोचना पड़ता है, ख्वाहिशों को पूरा करना तो दूर की बात है.मनमोहन जी जब से प्रधानमंत्री बने हैं तब से 642 करोड़ रुपए (RTI  के अनुसार) सिर्फ़ हवाई यात्रा पर खर्च कर चुके हैं.
अगर मैं अपने हिस्से का पैसा अलग करूँ तो कम से कम दो चार कंप्यूटर लॅंग्वेज तो ज़रूर सिख लेता ,five star  होटल मे डिनर भी हो जाती ,और कुछ नही तो एक बार मुंबई जाकर दिया मिर्ज़ा से मिलकर तो ज़रूर आ गया होता.लेकिन नही इनको तो हमारे अरमानो पर पानी फेरने की ज़िद पड़ी हुई थी,

लेकिन एक बात कहना चाहूँगा कि,

तुम चाहे तूफ़ानो को जितनी इज़ाज़त दे दो,
लेकिन हमे भी ज़िद है यहीं आशियाँ बनाने कि.

अरे इतनी बार तो महबूबा भी धोखा नही देती,जितनी बार इस सरकार ने देश की जनता को पिछले 9 सालो मे दिया है.हमारे प्रधानमंत्री सदन मे शायराना अंदाज़ मे कहते हैं की मैं तो मजबूर हूँ.अब इन्हे कौन समझाए की शायरी करने का काम हमारा है इनका नही.अगर इन्होने बस अपना काम किया होता तो आज ना जाने कितने लोगों का भला हो गया होता.
लेकिन एक बात याद रखिए की अगर आप मजबूर हैं तो ठीक है लेकिन देश की जनता मजबूर नही है.

जाते जाते बस इतना कहना चाहूँगा कि,

शान-ए-जंगल शेर सही, कब तक रहेगा,
सत्ता परिवर्तन को एक हीरा जन्म ले चुका है.

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धन्यवाद!

Saturday, 20 July 2013

मैं और वो





                       एक चाँदनी रात की बात थी,
                       जब  वो  मेरे साथ  थी,

                      ज़ुल्फो को उसकी सँवारता रहा,
                      अपनी चाँद को मैं निहारता रहा,

                      ख्वाबो में उसके उतरने को था,
                      जादू से उसके बहकने को था.

                      रातों की नींद उड़ने लगी थी,
                      दिन का चैन खोने लगा था.

                      सांसो की मुझको फ़िक्र ही नही थी,
                      मुझमे बसी थी धड़कन जो उसकी.

                     आशियाने की चाहत नही थी मुझको,
                     आँचल जो उसका मेरा साथ अब था.

                     धड़कने लगा था मेरा दिल जब से,
                     तड़पने लगी थी वो भी तब से,

                     कशिश जो उसकी आँखो में थी,
                    दीवाना बनाती है अब भी वो मुझको,

Wednesday, 17 July 2013

first crush-is this love...?



people says that it is not possible for anyone to forget their first crush.This is absolutely true at least in my case.I still remember the day when i saw her for first time.The girl in the pink dress with enchanting eyes and open hair.Her attracting smile touched my soul.And every time she smiled it seemed that she is smiling only for me.I always wanted to see her,feel her.There was a special kind of feeling which was attracting me towards her.The way she talked,the way she walked,the way she dance,i used to love the every moment of her.Her sincerity,her intelligence and her mesmerising beauty will always be remember in my life as most memorable moments.
Recently i met her after long time....and ...feeling...can't be described in words..
I don't know love is blind or not but she makes me completely blind with her love.

Monday, 15 July 2013

happy birthday himanshu




The above pictures is of my younger brother Himanshu. 
He turns 13 today.Unfortunetly i am not with him this year to celebrate his birthday but i wish him many many happy returns of the day and wish him great luck for his future.God bless you Himanshu.

Saturday, 13 July 2013

तेरा ख़याल



                     कुछ तो ख़याल होगा तुझे मेरी मोहब्बत का,
                    अगर नही तो मेरे नाम का एक दिया ही जला दे. 

                    कुछ तो ख़याल होगा तुझे मेरी आदत का,
                    अगर नही तो अपने चेहरे से परदा ही हटा दे.

                   कुछ तो ख़याल होगा तुझे मेरी शोहरत का,
                   अगर नही तो दुनिया को हमारे फसाने ही सुना दे,

                   कुछ तो ख़याल होगा तुझे मेरी तड़प का,
                  अगर नही तो फिर से मुझे अपना ही बना ले,
                
                  नीतीश

Sunday, 7 July 2013

एक एहसास


कल्पना से परे है तेरा प्यार,
जिसमे तेरा ही नशा है मेरे यार,
खूबसूरत वादियों में घूमते हुए पंछी की तरह,
चलो बसाते हैं अपना घर संसार.

जिसमे तुम्हारा साथ हो,

तुम्हारा एहसास हो,
प्यार की गीत हो, 
नये-नये प्रीत हो,

एक कोरी किताब हो,

जिसमे लिखेंगे अपनी दास्तान,
ज़माने के लिए नही,
अपनी यादों को ज़िंदा रखने के लिए,
अपनी ख्वाबों को हक़ीकत बनाने के लिए,
और ज़िंदगी को जन्नत मे गुज़ारने के लिए.

नीतीश

Saturday, 6 July 2013

उफ़ ये शायरी ....और वो.




                           अब आ गये हो तो थोड़ी देर ठहर ही जाओ,
                   ये दिल तुम्हारा ही है,गैरों का बसेरा नही.

                   तू लौट आई है, मेरी दुआ कबूल हुई,
                   पर अफ़सोस,
                  तू फिर चली जाएगी, उसकी दुआ के खातिर.

Tuesday, 2 July 2013

संवेदना



प्रस्तुत कविता समर्पित है उन सभी लोगो को जो किसी ना किसी रूप में उत्तराखंड की त्रासदी में प्रभावित हुए हैं और जिन्होने अपनी जिंदगी खो दी. ये कविता सही मायने मे एक श्रधांजलि है और इसे ज़रूर शेयर करें.

पल भर का क्षण,
और सब कुछ तबाह हो गया,
ऐसी माया थी कुदरत की,
कि मनुष्य लाचार हो गया.
ना जाने कितने मर गये,
ना जाने कितने लापता हैं,

क्षत् विक्षत् लाशें बिखरीं हैं

पहचान की तलाश में,
पर शायद ये मुमकिन ना हो.
लोग भटक रहे हैं,
अपनो की तलाश में,

पर उनका दर्द,

कौन समझता है?
शायद सिर्फ़ वो,
जिन्होने खोया है ,
अपनो को,
जिन्हे वो चाहते थे,
जान से भी ज़्यादा,
अपने आप से भी ज़्यादा.

पर इस भयावह त्रासदी का ज़िम्मेदार कौन?

मनुष्य या प्रकृति?
जवाब सबके  पास है,

 पर क्या फ़र्क पड़ेगा, 

उस बेटे को जिससे दूर हो गयी उसकी माँ,
उस बेटी को जिसके सर पिता का साया छिन गया.
उस सुहागिन को जो पल भर में विधवा हो गयी.

ये कैसी विडंबना है,

इस दुख की घड़ी में भी,
हुक्कमरानो को कुछ फ़िक्र ऩही.
लोगों की ,देश की,
उन्हे फ़िक्र है तो सिर्फ़ राजनीति की,
मूवावाजे के मरहम की,
ज़ख़्मों पर नमक छिड़कने की,
पर इन सत्ता के नसेडियों को,
कौन समझाए?

समझदार हैं तो केवल

हमारे वीर जवान.
जिन्होने इस आपदा में,
निस्वार्थ सेवा की.
हर संभव मदद पहुचने में,
लोगों को बचाने में,
सलाम करता हूँ इस जज़्बे को,
और नमन करता हूँ उन शहीद जवानों को.

नीतीश